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दिल्ली/NCR

यमुना एक्सप्रेसवे: ‘स्पीड’ नहीं, साक्षात ‘मौत’ दौड़ रही है! 2025 में 113 मौतें, 9 सालों का आंकड़ा देख कांप जाएगी रूह

यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है. दो वाहनों के बीच 70 मीटर की दूरी रखना अनिवार्य है. लेकिन अधिकांश चालक इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं. खासकर सर्दियों में कोहरे के दौरान दृश्यता शून्य तक पहुंच जाती है जिससे टक्कर और पलटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं.

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में 763 हादसों में 146 मौतें, 2018 में 659 हादसों में 111 मौतें, 2019 में 560 हादसों में 195 मौतें,2020 में 509 हादसों में 122 मौतें, 2021 में 424 हादसों में 136 मौतें, 2022 में 303 हादसों में 106 मौतें, 2023 में 411 हादसों में 95 मौतें, 2024 में 528 हादसों में 112 मौतें दर्ज की गईं. जबकि 2025 में अभी साल पूरा भी नहीं हुआ और हादसों की संख्या 1198 तक पहुंच चुकी है, जो स्थिति की गंभीरता को साफ दिखाता है.

रोजाना 30 हजार वाहन गुजरते हैं एक्सप्रेसवे से

यमुना एक्सप्रेसवे से रोजाना करीब 30 हजार वाहन गुजरते हैं. भारी वाहनों और तेज रफ्तार कारों की संख्या अधिक होने के कारण जोखिम और बढ़ जाता है. नींद, ओवरस्पीड और सेफ डिस्टेंस न रखने को हादसों की मुख्य वजह माना जा रहा है.

सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम

यमुना एक्सप्रेसवे टोल प्रशासन के अनुसार, रात के समय भारी वाहन चालकों को मुफ्त में चाय पिलाई जा रही है सुरक्षित सफर के लिए पर्चे बांटे जा रहे हैं. हल्के वाहनों की गति सीमा 75 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों की 60 किमी प्रति घंटा तय की गई है. बड़े वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाए जा रहे हैं और जरूरत के अनुसार सुरक्षा सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं.

आगे और बढ़ सकता है यातायात दबाव

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे पर यातायात का दबाव और बढ़ने की संभावना है. ऐसे में अगर चालक नियमों का पालन नहीं करते हैं तो हादसों का खतरा और गंभीर हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि सेफ डिस्टेंस और गति सीमा का सख्ती से पालन ही हादसों को रोकने का सबसे कारगर उपाय है, नहीं तो यमुना एक्सप्रेसवे पर यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा.

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