ब्रेकिंग
Indore Spiritual Update: 81 साल बाद बना ऐसा अद्भुत योग, शहरभर में 1200 से अधिक स्वजन करेंगे पूर्वजों... MP Crime Update: बैसाखी के सहारे एसपी कार्यालय पहुंचे घायल ग्रामीण, पुलिस पर मामले में गंभीर धाराएं ... Indore Cyber and Police Update: खजराना थाना पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई, गुम हुए महंगे स्मार्टफोन उन... MP Conversion Case: दमोह में एक ही परिवार की आईडी से जुड़े बच्चों के नाम, पुलिस ने मुख्य आरोपी को दब... Uttar Pradesh Teacher Suspended: इटावा में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल की करतूत, छात्र का मजाक उड़ाने ... RTU Kota News: हॉस्टल में बीटेक छात्र की संदिग्ध मौत पर बवाल, पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर किया ... Madhya Pradesh News: कार्य में गंभीर उदासीनता पर गिरी गाज, बड़वानी में कलेक्टर के निर्देश पर सख्त का... IMD Weather Forecast: उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक बारिश की चेतावनी, जानें अपने राज्य के मौसम का हाल Bhopal Police Action: नई साइट दिखाने के बहाने किडनैपिंग, आरोपियों ने खाते में ट्रांसफर करवाए 50 हजार... Panna Sidhi Train Service: पश्चिम मध्य रेल ने भेजा प्रस्ताव, विंध्य के इन दो जिलों में जल्द शुरू होग...
लाइफ स्टाइल

हेल्दी बेबी के लिए थाइरॉइड कंट्रोल जरूरी! प्रेग्नेंसी में लापरवाही पड़ सकती है भारी, जानें बचाव के तरीके

आजकल थाइरॉइड की समस्या महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है. यह एक हॉर्मोनल गड़बड़ी है, जो शरीर की कई ज़रूरी प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है. खासतौर पर जब कोई महिला बच्चा प्लान कर रही हो, तब थाइरॉइड का संतुलित होना बेहद अहम होता है. प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में हॉर्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं और ऐसे में थाइरॉइड का सही तरह से काम करना मां और होने वाले बच्चे दोनों की सेहत के लिए जरूरी होता है. कई बार महिलाएं बिना जांच के ही गर्भधारण की कोशिश करती हैं, जिससे आगे चलकर दिक्कतें सामने आ सकती हैं.ऐसे में आइए जानते हैं कि बच्चा प्लान करने से पहले थाइरॉइड को कंट्रोल करना क्यों जरूरी है.

प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले थाइरॉइड कंट्रोल करना क्यों जरूरी है?

आरएमएल हॉस्पिटल में महिला रोग विभाग में डॉ. सलोनी चड्ढा बताती हैं कि थाइरॉइड हॉर्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, एनर्जी लेवल और हॉर्मोनल संतुलन को कंट्रोल करता है. जब कोई महिला प्रेग्नेंसी की प्लानिंग करती है, तब शरीर को अधिक हॉर्मोनल सपोर्ट की जरूरत होती है. ऐसे में अगर थाइरॉइड असंतुलित हो, तो गर्भधारण में देरी हो सकती है या बार-बार रुकावट आ सकती है.

थाइरॉइड कंट्रोल में रहने से ओव्यूलेशन प्रक्रिया बेहतर तरीके से होती है, जिससे कंसीव करने की संभावना बढ़ती है. इसके अलावा, प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में बच्चे का विकास पूरी तरह मां के थाइरॉइड हॉर्मोन पर निर्भर करता है. इसलिए डॉक्टर पहले से थाइरॉइड को नॉर्मल लेवल में लाने की सलाह देते हैं. सही समय पर इलाज और निगरानी से गर्भावस्था को सुरक्षित बनाया जा सकता है.

असंतुलित थाइरॉइड से प्रेग्नेंसी पर क्या असर हो सकते हैं?

अगर थाइरॉइड कंट्रोल न हो, तो प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह की परेशानियां सामने आ सकती हैं. इससे गर्भधारण में कठिनाई, शुरुआती महीनों में मिसकैरेज का खतरा और समय से पहले डिलीवरी की आशंका बढ़ सकती है. कुछ मामलों में बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी असर पड़ सकता है.

मां को हाई बीपी, थकान, सूजन और हॉर्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा, डिलीवरी के बाद भी जटिलताएं देखने को मिल सकती हैं. इसलिए असंतुलित थाइरॉइड को नजरअंदाज करना मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है.

थाइरॉइड को कंट्रोल में कैसे रखें?

डॉक्टर की सलाह से नियमित थाइरॉइड टेस्ट कराएं.

दवा रोज़ तय समय पर लें.

संतुलित और पौष्टिक डाइट अपनाएं.

पर्याप्त नींद और आराम करें.

तनाव कम रखने की कोशिश करें.

खुद से दवा की मात्रा न बदलें.

Related Articles

Back to top button