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मध्यप्रदेश

भेड़पालकों का चलता फिरता ATM, सालभर में आराम से 3 लाख तक मुनाफा

सीधी : अक्सर किसानों की शिकायत रहती है कि उन्हें फसल के सही दाम नहीं मिलते. किसानों की पीड़ा ये भी रहती है कि उन्हें मौसम पर निर्भर रहना पड़ता है. कभी सूखा पड़ जाता है तो कभी ज्यादा बारिश से फसल नष्ट हो जाती हैं. किसान पूरी तरह से खेती पर डिपेंड रहते हैं. इसलिए फसल नष्ट होने पर उनके सामने जीवनयापन की बड़ी समस्या आ जाती है. ऐसे में किसानों को खेती के साथ ही पशुपालन की सलाह दी जाती है.

भेड़पालन से दिखाई किसानों को राह

सीधी के भेड़पालक अजोध्या प्रसाद पाल ऐसे किसानों के लिए एक उदाहरण बन गए हैं, जो केवल खेती पर डिपेंड रहते हैं. अजोध्या प्रसाद बताते हैं “कई सालों की मेहनत के बाद अब वह भेड़पालन से ठीकाक कमाई कर लेते हैं.”

चुरहट क्षेत्र के भेलकी गांव के किसान अजोध्या प्रसाद पाल ने साबित कर दिया है कि यदि सही योजना, धैर्य और मेहनत हो तो परंपरागत पशुपालन भी मुनाफे का बड़ा जरिया बन सकता है. बीते करीब 50 वर्षों से भेड़पालन कर रहे अजोध्या प्रसाद आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा भी बन चुके हैं.

अजोध्या प्रसाद के पास देसी नस्ल की 75 भेड़ें

अजोध्या प्रसाद ने भेड़पालन की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से की थी. उन्होंने केवल एक देसी नस्ल की भेड़ से अपने इस सफर की नींव रखी. समय के साथ अनुभव बढ़ता गया और आज उनके पास लगभग 75 देसी नस्ल की भेड़ें हैं. यही भेड़ें उनकी नियमित आय का मुख्य साधन हैं.

खास बात यह है कि उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए मंडी के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. खरीदार खुद उनके घर तक पहुंच जाते हैं और भेड़ों के बच्चे हाथों-हाथ बिक जाते हैं.

सालभर में 30 भेड़ बेचते हैं अजोध्या प्रसाद

अजोध्या प्रसाद पाल बताते हैं “हर साल औसतन 30 भेड़ों के बच्चे बिक जाते हैं, जिससे अच्छी-खासी आमदनी हो जाती है. भेड़पालन कठिन काम नहीं है, बस नियमित देखभाल और सही प्रबंधन जरूरी है. वह देसी नस्ल की भेड़ों को सबसे बेहतर मानते हैं, क्योंकि ये स्थानीय मौसम के अनुकूल होती हैं, बीमार कम पड़ती हैं और इन पर खर्च भी कम आता है. स्थानीय चारा, हरा चारा और सूखा भूसा इनके लिए पर्याप्त होता है.”

एक साल में ही भेड़ बेचने लायक हो जाती है

अजोध्या प्रसाद बताते हैं “अच्छी देखभाल से 1 साल में भेड़ बेचने लायक हो जाती है. एक अच्छी देसी भेड़ 7 से 8 हजार रुपये तक बिक जाती है. वे हर छह महीने में औस्तन 18 भेड़ बेच लेते हैं, जिससे पूरे साल आमदनी बनी रहती है. 12 महीने में भेड़ बेचने लायक हो जाती है. एक अच्छी देसी भेड़ 7 से 8 हजार रुपये तक बिक जाती है. वह हर छह महीने में 15 से 20 भेड़ बेच लेते हैं.”

भेड़ों का रखरखाव भी आसान

सीधी जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉ.एमपी गौतम के अनुसार “भेड़ों के लिए साफ, खुली और हवादार जगह बेहद जरूरी है. दिन में चराई और रात में सुरक्षित बाड़ा भेड़ों को स्वस्थ रखता है. सर्दियों में ठंड से बचाव के लिए बाड़े को ढंकना और सूखा बिछावन देना जरूरी होता है, खासकर छोटे मेमनों के लिए.”

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