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Iran Border Crisis: ईरान की सरहद पर क्यों जुटे इस्लामिक स्टेट के 7 हजार आतंकी? दुनिया भर में मचा हड़कंप

अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए सीरिया के उत्तर-पूर्वी इलाकों से इस्लामिक स्टेट (ISIS/ISIL) से जुड़े करीब 7,000 संदिग्ध आतंकियों को इराक भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह इलाका इराक की उस सीमा के पास है, जो आगे चलकर ईरान से भी जुड़ती है. सवाल उठ रहा है आखिर इन आतंकियों को अचानक यहां क्यों शिफ्ट किया जा रहा है?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला हाल ही में हुई जेल से भागने की घटना (जेलब्रेक) के बाद लिया गया. सीरिया में सरकारी सेना उन इलाकों में आगे बढ़ रही है, जो लंबे समय से अमेरिका समर्थित कुर्द बलों (SDF) के नियंत्रण में थे. इन इलाकों में कई ऐसे जेल और कैंप हैं, जहां ISIS लड़ाके और उनके परिवार रखे गए थे. हालात बिगड़ते देख अमेरिका को डर था कि बड़े पैमाने पर आतंकी फरार हो सकते हैं.

पहली खेप इराक पहुंची

अमेरिकी सेना ने बुधवार को पुष्टि की कि हसाका (Hasakah) स्थित एक डिटेंशन सेंटर से 150 ISIS संदिग्धों को इराक के सुरक्षित ठिकानों पर भेजा गया है. अमेरिका का कहना है कि आगे चलकर 7,000 तक आतंकियों को इराकी जेलों में शिफ्ट किया जा सकता है. इराक की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस कदम को मंजूरी दी है. इराकी सरकार ने साफ कहा किइराकी और विदेशी आतंकियों को सरकारी जेलों में रखा जाएगा. पहली खेप में ऐसे आतंकी शामिल हैं, जिन पर निर्दोष इराकियों की हत्या के आरोप हैं.

SDF पीछे हटी, सीरियाई सेना आगे बढ़ी

अब तक इन जेलों की सुरक्षा कुर्द नेतृत्व वाली SDF करती थी. लेकिन जैसे-जैसे सीरियाई सरकार ने उत्तर-पूर्वी इलाकों में नियंत्रण बढ़ाया, SDF कई जगहों से पीछे हट गई. इस दौरान अल-होल कैंप, जहां ISIS लड़ाकों के परिवार रहते हैं, वहां भी नियंत्रण बदला. हाल ही में सीरियाई सरकार और SDF के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ है.

कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है अमेरिका

अमेरिका ने कहा है कि हम इराकी सरकार समेत क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. आतंकियों का सुरक्षित ट्रांसफर जरूरी है, ताकि ISIS दोबारा संगठित न हो सके. अमेरिका को डर है कि अगर ये आतंकी खुले, तो इराक, सीरिया ही नहीं, पूरे क्षेत्र यहां तक कि ईरान की सीमा तक अस्थिरता फैल सकती है. भले ही ISIS को 2017 में इराक और 2019 में सीरिया में हार मिली हो, लेकिन संगठन के स्लीपर सेल आज भी सक्रिय हैं. यही वजह है कि अमेरिका कोई जोखिम नहीं लेना चाहता.

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