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छत्तीसगढ़

Bastar Pandum 2026: बस्तर में 7 फरवरी से शुरू होगा ‘बस्तर पंडुम’, आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का दिखेगा अद्भुत संगम

जगदलपुर: बस्तर सिर्फ माओवाद और उससे होने वाली हिंसा के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान के लिए भी जाना जाता है. इसी कड़ी में, बस्तर की माटी की खुशबू और यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्वपटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है.

आने वाले 7 से 9 फरवरी तक आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 को लेकर अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है. इस वर्ष के आयोजन ने लोकप्रियता के पुराने सभी पैमाने ध्वस्त कर दिए हैं. यह केवल एक प्रतियोगिता न रहकर अब लोक संस्कृति के एक विशाल उत्सव का रूप ले चुका है. आंकड़ों पर नजर डालें तो यह आयोजन इस बार एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर रहा है.

बस्तर पंडुम 2026

साल 2025 में विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा सातों जिलों में तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुंच गया है. प्रतिभागियों की संख्या में आया यह भारी उछाल साफ बताता है कि बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने जागरूक और उत्साहित हैं. विशेष रूप से दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है. जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई.

बस्तर में आदिवासी संस्कृति का लगेगा रंगारंग मेला

बस्तर पंडुम को लेकर सभी की निगाहें 7 से 9 फरवरी के बीच होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं. जिलास्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला का जादू दिखाएंगे. इन तीन दिनों में बस्तर की फिजां में जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज, स्थानीय व्यंजन-पेयपदार्थ और नाटकों का मंचन आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा.

कलाकारों का पहुंचेगा कारवां

प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा. जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक सहित अन्य विधा में हुनर दिखाएंगे. यह मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह बस्तर के ज्ञान, स्वाद और कला का एक अद्भुत संगम भी होगा. जहां एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की तान छेड़ेंगे. वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू से माहौल को सराबोर करेंगे.

दुर्लभ जड़ी बूटियां भी देखने को मिलेगी

बस्तर पंडुम के दौरान बस्तर की दुर्लभ वन औषधियों, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा. जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराएगा. इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है. संभाग स्तर पर पहुँचने वाले 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है. जिसमें 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं.

यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहाँ की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं. कुल मिलाकर बस्तर पंडुम 2026 अपनी भव्यता, जन-भागीदारी के साथ अविस्मरणीय आयोजन की गवाह भी बनेगी.

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