ब्रेकिंग
HCL मलाजखंड और आईआईटी कानपुर की SATHEE पहल ने मलाजखंड में आयोजित किया करियर काउंसलिंग एवं जागरूकता स... गाजियाबाद में निषाद पार्टी का कार्यक्रम, काफी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क...
मध्यप्रदेश

Bhopal Hospital Fraud: भोपाल के सरकारी अस्पताल में मौत का डर दिखाकर ठगी, मरीजों के परिजनों से ‘इलाज’ के नाम पर वसूली

भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में इलाज के लिए आए गरीब और मजबूर परिवारों की पीड़ा को हथियार बनाकर एक शातिर ठग ने ऐसा खेल खेला, जिसने सबको हिला कर रख दिया. खुद को डॉक्टर बताने वाला यह जालसाज अस्पताल के वार्डों में बेखौफ घूमता रहा और मरीजों के परिजनों को मौत का डर दिखाकर उनसे ऑनलाइन पैसे ऐंठता रहा.

आरोप है कि यह ठगी अकेले किसी एक व्यक्ति की नहीं थी, बल्कि इसके पीछे अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी थी, जो मरीजों की गोपनीय जानकारी उसे उपलब्ध कराते थे.

QR कोड से वसूलता था रकम

पुलिस जांच में सामने आया है कि जितेंद्र खाकरे नाम का आरोपी मरीजों के परिजनों को फोन कर खुद को अस्पताल का डॉक्टर बताता था. वह कहता था कि मरीज की हालत गंभीर है, तुरंत दवाइयों या ऑपरेशन के लिए पैसे भेजना जरूरी है. घबराए हुए परिजन भरोसे में आकर उसके भेजे गए QR कोड पर तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते थे. रकम मिलते ही आरोपी फोन बंद कर देता या नंबर ब्लॉक कर देता था.

अस्पताल के कर्मचारी देते थे जानकारी

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी को मरीज का नाम, बीमारी, वार्ड नंबर, ऑपरेशन की तारीख और परिजनों के मोबाइल नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी अस्पताल के ही कुछ कर्मचारी उपलब्ध कराते थे. इसके बदले उन्हें हर ठगी की रकम का करीब 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था. अब तक कम से कम 7 कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है.

पीड़ितों ने पुलिस को बताई आपबीती

एक पीड़ित विनोद अहिरवार ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी अस्पताल में भर्ती थी. एक कॉल आया, कॉलर ने खुद को डॉक्टर बताते हुए कहा कि लिवर में सूजन है और बाहर से दवा मंगानी होगी. 5 हजार रुपए QR कोड पर भेजने के बाद उनका नंबर ब्लॉक कर दिया गया. वहीं, नितिश विश्वकर्मा को कॉल कर कहा गया कि उनकी गर्भवती पत्नी और नवजात की हालत नाजुक है. डर के कारण उन्होंने दो बार में करीब 11 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए.

कैसे आरोपी तक पहुंची पुलिस?

लगातार शिकायतों के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन ने पुलिस को सूचना दी और एक विशेष रणनीति बनाई गई. पीड़ित के जरिए आरोपी से दोबारा संपर्क कराया गया. जैसे ही आरोपी ने कॉल किया, साइबर टीम ने नंबर ट्रेस कर लिया. तीन दिन की निगरानी के बाद आरोपी को इंदौर से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया.

45 दिनों में 10 से ज्यादा परिवार शिकार

पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले डेढ़ महीने में इसी तरीके से 10 से ज्यादा मरीजों के परिजनों को ठग चुका है. हर परिवार से 7 से 10 हजार रुपए की वसूली की गई. फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं.

Related Articles

Back to top button