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मध्यप्रदेश

Bandhavgarh News: बांधवगढ़ की लाडली का टूटा सपना! हेलिकॉप्टर से होनी थी विदाई, लेकिन खौफनाक अंत ने सबको रुलाया

उमरिया : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से जिस बाघिन को राजस्थान भेजने के लिए रेस्क्यू किया गया था, उसे फिर जंगल में छोड़ दिया गया है. जंगल में छोड़ने के बाद बाघिन के हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है. राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए बाघिन को शिफ्ट करने की प्लानिंग है.

बांधवगढ़ की बाघिन को एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान जाना था. यहां से उसकी दुल्हन की तरह धूमधाम से विदाई होनी थी. इसकी तैयारी के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर का ट्रायल लैंडिंग भी हो चुका है.

ट्रांसलोकेशन गाइडलाइंस का पालन नहीं हो सका

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय बताते हैं “6 फरवरी को बाघिन का रेस्क्यू करके मगधी क्षेत्र के बहेरहा एंक्लोजर में निगरानी में रखा गया. बाघिन को राजस्थान के टाइगर रिजर्व में ट्रांसलोकेट करने के मकसद से रेस्क्यू किया गया. रेस्क्यू करने के बाद बाघिन को 2 दिन तक लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया. इस दौरान ये पाया गया कि ये बाघिन NTCA द्वारा जारी ट्रांसलोकेशन गाइडलाइंस में निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई.”

बाघिन को दो दिन एनक्लोजर में रखा

इसके बाद बाघिन को 9 फरवरी को 11:30 बजे ताला परिक्षेत्र के दमना बीट में सभी सुरक्षा मानकों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया. बाघिन को बड़े एनक्लोजर में रखा गया था, जहां वन्य जीव विशेषज्ञ और वन विभाग के डॉक्टरों ने उसकी हरेक मूवमेंट पर नजर रखी.

इंसानी गतिविधियों से घुल मिल चुकी है बाघिन

इस दौरान ये बात भी सामने आई कि बाघिन पर्यटक और उनके वाहनों को देखकर बिल्कुल भी नहीं डरती. वह इंसानी गतिविधियों के बीच रहने के चलते काफी सहज हो चुकी है. उसने कोई आक्रामक व्यवहार भी नहीं दिखाया. वह इंसानों के लेकर इतनी फ्रेंडली हो चुकी है उसे किसी नए और अंजान जंगल में छोड़ना उसकी जान को खतरे में डाल सकता है. इसलिए उसे फिर से वापस उसके क्षेत्र में छोड़ दिया गया.

राजस्थान को चाहिए मध्य प्रदेश की बाघिन

राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व को एक एडल्ट बाघिन चाहिए, जो बाघों का कुनबा बढ़ा सके. ऐसी बाघिन की उम्र 3 से 5 साल तक के बीच होनी चाहिए, जो प्रजनन करने योग्य हो. इस बारे में राजस्थान सरकार ने भारत सरकार के माध्यम से परमिशन लेकर मध्य प्रदेश से 03 टाइगर और महाराष्ट्र से 02 टाइगर मांगे हैं. इसी कड़ी में पेंच टाइगर रिजर्व से राजस्थान जा चुकी है. अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से बाघिन ले जाने की तैयारी है.

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