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छत्तीसगढ़

बस्तर में बड़ा सरेंडर: 22 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, बोले- ‘पूना नारकोम’ अभियान से मिली नई जिंदगी

सुकमा : नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक और बड़ी सफलता दर्ज करते हुए सुकमा जिले में सक्रिय 22 माओवादियों ने हथियार छोड़े हैं. आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में एक महिला कैडर भी शामिल हैं. जिला पुलिस द्वारा संचालित पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के सकारात्मक प्रभाव के कारण इन माओवादियों ने हथियार छोड़कर विकास और शांति का रास्ता चुना.

फोर्स ने निभाई बड़ी जिम्मेदारी

जिला पुलिस के अनुसार, डीआरजी सुकमा, जिला बल, रेंज फिल्ड टीम (आरएफटी) जगदलपुर और सीआरपीएफ की 02, 74, 111, 223, 227 और कोबरा 201 वाहिनी की आसूचना शाखा ने आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. लगातार सफल ऑपरेशनों और बढ़ते सुरक्षा दबाव के बीच संगठन के भीतर असंतोष और भय का वातावरण बना, जिससे कई सदस्य वापसी के लिए तैयार हुए.

सरकार की योजनाओं ने डाला असर

आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश सदस्य पेद्दाबोडकेल, बेड़मा, बैयमपल्ली, मोरपल्ली और गोंडेरास क्षेत्र के आरपीसी मिलिशिया, डीएकेएमएस और अन्य सहयोगी संगठनों से जुड़े थे. इनमें ग्राम स्तर के कमांडर, मिलिशिया सदस्य, कृषि कमेटी अध्यक्ष और जनताना सरकार से जुड़े पदाधिकारी भी शामिल हैं.इनका कहना है कि वर्षों तक जंगलों में रहकर संघर्ष करने के बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि हिंसा से न तो उनका भविष्य सुरक्षित है और न ही उनके परिवारों का. शासन की पुनर्वास नीति और पुलिस की समझाइश ने उन्हें नई शुरुआत का भरोसा दिया.

फोर्स के दबाव के कारण कमजोर पड़ रहा संगठन

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति, अंदरूनी क्षेत्रों में लगातार स्थापित हो रहे नए सुरक्षा कैंप, सुदृढ़ सड़क संपर्क और तेजी से पहुंच रहे विकास कार्यों ने माओवादी संगठन की पकड़ को कमजोर किया है. यही कारण है कि संगठन से जुड़े सदस्य अब आत्ममंथन कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं.उप पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑप्स रोहित शाह ने कहा कि नक्सल मुक्त बस्तर का संकल्प केवल सुरक्षा बलों का अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता का परिणाम है

जब स्थानीय युवा विकास की मुख्यधारा से जुड़ते हैं, तब स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होता है. जो लोग अभी भी भटके हुए हैं, उनके लिए आत्मसमर्पण का द्वार खुला है और शासन उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास का अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है- रोहित शाह, ASP नक्सल ऑपरेशन

क्या है सरकार की पुनर्वास योजना ?

छत्तीसगढ़ शासन की छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण,पीड़ित राहत पुनर्वास नीति–2025 के तहत प्रत्येक आत्मसमर्पित सदस्य को 50-50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी. इसके अतिरिक्त कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें.

परिवार के लिए विकास का रास्ता चुना

इस आत्मसमर्पण को केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठे कदम के रूप में देखा जा रहा है.वर्षों से भय और बंदूक की साए में जी रहे परिवारों के लिए यह निर्णय नई उम्मीद लेकर आया है. आत्मसमर्पित सदस्यों ने भी विश्वास जताया कि वे अब अपने बच्चों को शिक्षा दिलाकर बेहतर भविष्य देना चाहते हैं और समाज के साथ मिलकर विकास की धारा में आगे बढ़ेंगे.

जंगल में अब खामोश होती जा रही बंदूक

सुकमा में 22 माओवादियों का आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि बदलते हालात और सकारात्मक पहलें अब जंगलों की खामोशी को तोड़ रही हैं.बंदूक की आवाज धीमी पड़ रही है और विकास की दस्तक तेज हो रही है. पूना मारगेम अभियान ने यह साबित कर दिया है कि पुनर्वास और विश्वास के सहारे शांति की नींव मजबूत की जा सकती है.

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