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छत्तीसगढ़

पैसा बचाने का जादुई तरीका! ‘5% मॉडल’ से भविष्य के लिए होगी बड़ी बचत, जानिए कैसे काम करता है ये फॉर्मूला

कोरिया: जल संकट से जूझते देश के लिए छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से एक उम्मीद की किरण निकली है. यहां विकसित किया गया 5 प्रतिशत मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा. केंद्र सरकार ने कोरिया जिले के इस नवाचार को देशभर में लागू करने का फैसला किया है, जिससे जल संरक्षण की दिशा में एक नई क्रांति की शुरुआत मानी जा रही है.

देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है. ऐसे समय में कोरिया जिले का यह प्रयोग न केवल व्यवहारिक है, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित होने के कारण अत्यंत प्रभावी भी साबित हुआ है. केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब पूरा विश्व जल संकट को लेकर चिंतित है, तब कोरिया का यह मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है. आवा पानी झोंकी अभियान के तहत किसानों को अपनी कुल कृषि भूमि के 5 प्रतिशत हिस्से में सीढ़ीनुमा संरचना वाला सोख्ता गड्ढा बनाने के लिए प्रेरित किया गया.

कोरिया का पांच प्रतिशत मॉडल क्या है

इस मॉडल के तहत खेत या बाड़ी की कुल भूमि के 5 प्रतिशत भाग में सीढ़ीनुमा संरचना वाला सोख्ता गड्ढा तैयार किया जाता है. वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल पुनर्भरण किया जाता है, इससे न केवल भूजल स्तर में सुधार होता है बल्कि कृषि उत्पादकता में भी वृद्धि होती है.

आवा पानी झोंकी अभियान मॉडल की खासियत

  • वर्षा जल का स्थानीय स्तर पर संचयन
  • भूजल पुनर्भरण में तेजी
  • खेतों की नमी बरकरार
  • कम लागत और स्थानीय संसाधनों पर आधारित
  • किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी

बरसात के मौसम में इन सोख्ता गड्ढों में जल संचय होने से जमीन की नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इसका सीधा लाभ फसलों को मिलता है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है.

किसानों को जल संरक्षण के लिए किया जागरूक

कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में बैकुंठपुर और सोनहत विकासखंड के गांवों में विशेष अभियान चलाया गया. शिविरों, जनसंवाद और प्रचार-प्रसार के माध्यम से किसानों को इस मॉडल की जानकारी दी गई. परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किसानों ने स्वयं आगे आकर अपनी भूमि के एक कोने में सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया. यह पहल प्रशासन और किसानों के सामूहिक प्रयास का उदाहरण बन गई.

खेतों में पानी रोकने की व्यवस्था

यह मॉडल केवल पानी बचाने की योजना नहीं है, बल्कि यह किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का भी प्रयास है. खेत में ही पानी रोकने की व्यवस्था से सिंचाई पर निर्भरता कम होती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है. यदि इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू किया गया, तो देश में गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है.

पानी बचाने 5 प्रतिशत मॉडल

कोरिया जिले की यह पहल अब राज्य की सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय पहचान बना चुकी है. ‘5 प्रतिशत मॉडल’ आने वाले समय में जल संरक्षण के क्षेत्र में एक स्थायी और प्रभावी समाधान के रूप में स्थापित हो सकता है.

कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने जल संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मोर गांव में पानी चौकी शुरू करना एक अच्छा कदम है. उन्होंने बताया कि 5% मॉडल के तहत किसान अपने खेत में जल संरक्षण के लिए काम कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बैकुंठपुर और सोनहत में इस मॉडल को शुरू किया गया था और इसका अच्छा परिणाम मिला है. उन्होंने बताया कि इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने की बात कही गई है.

कलेक्टर ने बताया कि जिले में 144000 खेत हैं और अगर सभी किसान जल संरक्षण के लिए काम करें तो बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं. उन्होंने कहा कि थोड़ा-थोड़ा भी जल संरक्षित करने से ग्राउंडवाटर स्टडीज में अच्छे रिजल्ट्स मिल सकते हैं.

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