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मध्यप्रदेश

महापौर तो बन गए, अब डिप्टी मेयर की बारी! भाजपा ने तैयार किया खास प्लान, जानें कैसे चुना जाता है उपाध्यक्ष और उप-महापौर

रांचीः मेयर और पार्षद के चुनाव संपन्न होने के बाद भारतीय जनता पार्टी की नजर अप्रत्यक्ष रूप से डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के होने वाले चुनाव पर टिकी हुई है. भाजपा इसके लिए संगठनात्मक रूप से रणनीति तैयार करने में जुट गई है. पार्टी को उम्मीद है कि राज्य के सभी 48 नगर निकायों में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष की सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की जीत जरूर होगी. इसको लेकर महापौर या अध्यक्ष के अलावा पार्षद के पदों पर निर्वाचित होने वाले भाजपा समर्थित उम्मीदवार या पार्टी के कार्यकर्ता को चिन्हित किया जा रहा है.

डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष भाजपा समर्थित होंः मीडिया प्रभारी, भाजपा

प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक के अनुसार महापौर और पार्षद के निर्वाचन में अन्य दलों के अपेक्षा भारतीय जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की जीत अन्य दलों से अधिक हुई है, इसका लाभ हमें डिप्टी मेयर के चुनाव में भी मिलेगा. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि राज्य के 9 नगर निगम क्षेत्र में पांच महापौर भारतीय जनता पार्टी के समर्थित उम्मीदवार जीते हैं. ऐसे में पार्टी का यह मानना है कि जहां पर महापौर उनके दल के समर्थित उम्मीदवार चुने गए हैं वहां डिप्टी मेयर भी अपने ही दल का हो और जहां महापौर या अध्यक्ष उनके दल के नहीं हैं वहां भी डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष भाजपा समर्थित लोग हों.

बीजेपी के उम्मीद के अनुरूप नहीं आया है चुनाव परिणाम

शहरी क्षेत्र में अपना वोट बैंक मजबूत मान रही भाजपा को नगर निकाय चुनाव में उम्मीद के अनुरूप सफलता नहीं मिली है. राज्य के 48 शहरी निकाय क्षेत्र के सर्वोच्च पद महापौर/अध्यक्ष पद पर पार्टी समर्थित करीब 16 उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है. नौ नगर निगम में भाजपा समर्थित उम्मीदवार रांची, आदित्यपुर और मेदिनीनगर में जीत दर्ज करने में सफल रहे. बात यदि नगर परिषद की करें तो 20 सीटों में भाजपा समर्थित प्रत्याशी के झोली में तीन, कांग्रेस समर्थित दो, झामुमो समर्थित चार और स्वतंत्र उम्मीदवार 11 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रहे.

नगर पंचायत में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का पलड़ा भारी

नगर पंचायत में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की मजबूत स्थिति देखी गई जिसमें 6 सीटों पर भाजपा समर्थित, जेएमएम समर्थित चार और स्वतंत्र आठ उम्मीदवार जीतने में सफल रहे. वहीं एक सीट पर भाकपा माले समर्थित प्रत्याशी धनवार सीट से अध्यक्ष पद पर जीते. रांची महापौर सीट पर किसी तरह से पार्टी समर्थित उम्मीदवार रोशनी खलखो जीत दर्ज करने में सफल रहीं.

गिरिडीह और देवघर की सीटें भाजपा के हाथ से निकलीं

वहीं गिरिडीह, देवघर जैसे महत्वपूर्ण सीट भाजपा के हाथ से निकल गई हैं. गिरिडीह नगर निगम पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पहली बार कब्जा जमाया है, वहीं देवघर नगर निगम में भी झारखंड मुक्ति मोर्चा को पहली बार जीत मिली है. पिछले चुनाव में यहां रीता राज खबर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मेयर बनी थीं. इसी तरह धनबाद में भी भाजपा समर्थित प्रत्याशी पिछड़ते नजर आए और वहां संजीव सिंह ने रेकॉर्ड वोट से जीत दर्ज की.

मानगो में पहली बार हुए नगर निगम चुनाव में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी ने जीत दर्ज की. वहीं बोकारो के चास में पूर्व मेयर भोलू पासवान फिर से अपनी सीट बचाने में सफल रहे हैं.

डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष चुनाव में पार्षद निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका

नगर निगम के डिप्टी मेयर और नगर पंचायत, नगर परिषद के उपाध्यक्ष चुनाव में निर्वाचित पार्षद अहम भूमिका निभाते हैं. बात यदि रांची की करें तो यहां 53 वार्ड हैं जहां से पार्षद निर्वाचित हुए हैं. ये निर्वाचित पार्षद डिप्टी मेयर के चुनाव में मतदान करेंगे जिसे सर्वाधिक वोट आयेगा उसे निर्वाचित माना जायेगा. यहां 19 मार्च को डिप्टी मेयर के निर्वाचन की तिथि निर्धारित की गई है.

राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार सभी 48 नगर निकायों में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 10 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी. राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद के अनुसार सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए तिथिवार कार्यक्रम तय कर दिया है. आयोग का लक्ष्य है कि 10 दिनों के भीतर सभी निकायों में शपथ ग्रहण और डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष का चुनाव संपन्न करा लिया जाए.

इस तरह चुने जाते हैं डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष

नगर निगम क्षेत्रों में डिप्टी मेयर का चुनाव होगा जबकि नगर परिषद और नगर पंचायतों में उपाध्यक्ष चुने जाएंगे. आयोग के निर्देश पर रांची नगर निगम में 19 मार्च, धनबाद नगर निगम में 18 मार्च, मानगो नगर निगम में 17 मार्च और मेदिनीनगर नगर निगम में 14 मार्च को चुनाव कराए जाएंगे. यह चुनाव अप्रत्यक्ष रुप से होता है यानी आम मतदाता इसमें भाग नहीं लेंगे. इसमें केवल निर्वाचित वार्ड सदस्य ही मतदान करेंगे.

मेयर और अध्यक्ष इस चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे. निर्वाचित वार्ड पार्षदों में से कोई भी डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष पद के लिए खड़ा हो सकता है. इस पद के लिए किसी प्रकार का आरक्षण नहीं है. डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष के चुनाव एक ही दिन में संपन्न होंगे. प्रावधान के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले सभी वार्ड सदस्यों का शपथ ग्रहण होगा. नगर निगमों में मेयर को प्रमंडलीय उपायुक्त शपथ दिलाएंगे, जबकि नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्षों को जिला प्रशासन शपथ दिलाएगा. इसके बाद डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी.

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