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पंजाब

Punjab School News: पंजाब सरकार ने स्कूलों के लिए जारी किए नए दिशा-निर्देश, जानें क्या बदला और कब से लागू होगा नया नियम

लुधियाना: आखिर पंजाब केसरी की खबर ने फिर असर दिखाया और शिक्षा विभाग को निजी स्कूलों की मनमानियों के खिलाफ लिखित आदेश जारी करने पड़ गए। मामला कुछ निजी स्कूलों द्वारा अप्रैल की बजाय मार्च में ही नया सैशन शुरू करने को लेकर जुड़ा है जिसे लेकर पंजाब केसरी ने 3 दिन पहले एक खबर प्रकाशित करके शिक्षा विभाग और सी.बी.एस.ई. की नींद खोलने की कोशिश की गई थी।

खबर लगते ही सी.बी.एस.ई. ने भी जहां स्कूलों को पत्र जारी करने की तैयारी कर ली थी, वहीं जिला शिक्षा विभाग ने सरकार की हिदायतों का हवाला देते हुए सभी निजी स्कूलों चाहे किसी भी बोर्ड से संबंधित हो, को आदेश जारी कर दिया है कि विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं 1 अप्रैल से ही शुरू की जाएं कोई भी स्कूल मार्च में किसी भी क्लास के विद्यार्थियों को नए सैशन की क्लासों के लिए नहीं बुलाएगा। बता दें कि कई स्कूलों ने 1 अप्रैल से पहले ही सैशन ख़त्म करते हुए नए सैशन की क्लासेज अभी से शुरू कर दी थीं। इस बारे डी.ई.ओ. डिम्पल मदान ने बाकायदा पत्र भी जारी कर दिया है। अब देखना है कि निजी स्कूल डी.ई.ओ. की बात को कितनी गंभीरता से लेते हैं और डी.ई.ओ. अपने आदेश लागू करवाने के लिए क्या कदम उठाएंगी?

यही नहीं डी.ई.ओ. की ओर से जारी पत्र में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों और अभिभावकों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। आदेश में निजी स्कूल प्रबंधकों द्वारा किताबों और वर्दी के नाम पर की जा रही मनमानी पर नकेल कसने की तैयारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा की आड़ में पब्लिशर्स के साथ मिलकर किए जा रहे ‘कमीशन के खेल’ को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने जिले के सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा-वार किताबों और वर्दी की पूरी सूची अपनी आधिकारिक वैबसाइट के होम पेज पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। स्कूलों को इस आदेश के पालन के लिए केवल 3 दिन का समय दिया गया है। इस सूची में किताबों का शीर्षक (टाइटल), लेखक और प्रकाशक का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए, ताकि अभिभावक अपनी पसंद और बजट के अनुसार खुले बाजार से सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र रहें। विभाग ने चेतावनी दी है कि इन आदेशों का अक्षरश: पालन सुनिश्चित कर दफ्तर को सूचित किया जाए।

गैर-जरूरी किताबों का बोझ और अभिभावकों का शोषण
विभिन्न स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अध्यापकों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि निजी स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों पर ऐसी अनेक किताबों का बोझ डाल दिया जाता है, जिनका मुख्य पाठ्यक्रम (सिलेबस) से कोई सीधा संबंध नहीं होता। उदाहरण के तौर पर कई स्कूलों में छठी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस, फाइनैंशियल लिटरेसी, मार्कीटिंग, जनरल नॉलेज और मोरल साइंस जैसी महंगी किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। ये किताबें न केवल विद्यार्थियों के बैग का बोझ बढ़ा रही हैं, बल्कि अभिभावकों की जेब पर भी भारी पड़ रही हैं। अभिभावकों का आरोप है कि जब तक सभी बच्चे किताबें नहीं खरीद लेते, तब तक स्कूलों में इन्हें लाने का दबाव बनाया जाता है लेकिन एक बार बिक्री पूरी होने के बाद पूरे साल इन किताबों से कोई ठोस पढ़ाई नहीं करवाई जाती।

वर्दी की मोनोपॉली होगी ख़त्म
किताबों के साथ-साथ वर्दी बेचने के मामले में भी स्कूलों और चुनिंदा वैंडर्स की मिलीभगत सामने आती रही है। कई स्कूल हर साल वर्दी के रंग, डिजाइन या लोगो में मामूली बदलाव कर देते हैं जिससे अभिभावक पुरानी वर्दी का उपयोग नहीं कर पाते और उन्हें नए सैट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा स्कूलों द्वारा कुछ खास दुकानों को ही अधिकृत किया जाता है जहां वर्दी और अन्य सहायक सामग्री बाजार दर से कहीं अधिक कीमतों पर बेची जाती है। विभाग के नए आदेशों का उद्देश्य इस प्रकार की व्यापारिक एकाधिकार (मोनोपॉली) को समाप्त करना है।

स्कूलों के अंदर काऊंटर लगाकर किताबें बेचने पर विशेष नजर
विभागीय आदेशों के बावजूद कई स्कूल परिसरों के अंदर ही निजी काऊंटर लगाकर ऊंचे दामों पर किताबें और वर्दी बेची जा रही हैं। पिछले वर्ष भी इस संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई थीं, परंतु समय की कमी के कारण ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इस बार शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों पर अपनी पैनी नजर रखी हुई है जो नियमों का उल्लंघन कर स्कूल के भीतर व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं। “अभिभावकों की ओर से किताबों और वर्दी को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं जिसका संज्ञान लेते हुए यह आदेश जारी किए गए हैं। स्कूलों को तीन दिनों के भीतर अपनी वैबसाइट पर किताबों का पूरा विवरण सार्वजनिक करना होगा। किसी भी स्कूल को अभिभावकों पर किसी खास दुकान से सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई स्कूल इन आदेशों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”

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