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सोनम वांगचुक आज़ाद! 6 महीने बाद हटा NSA, केंद्र सरकार ने अचानक क्यों बदला अपना फैसला? जानें हिरासत रद्द होने की असली वजह

लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों का जिम्मेदार सोनम वांगचुक को माना गया था. घटना के समय केंद्र सरकार ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान वांगचुक को हिंसक प्रदर्शनों का मुख्य आरोपी बताया था. अब करीब छह महीने बाद केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक की हिरासत को रद्द कर दिया है.

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है. एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई है. बयान में कहा गया है कि वांगचुक पहले ही रासुका के तहत हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर चुके हैं. सरकार ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की याचिका पर अंतिम सुनवाई 17 मार्च के दो दिन पहले लिया. कोर्ट सुनवाई के दौरान वे वीडियो और फोटो देखेगा, जिनके आधार पर सरकार ने उन पर NSA लगाया था.

लेह से भेजा था जोधपुर जेल

बता दें कि लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को वांगचुक को हिरासत में लिया गया था. उन्हें लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर जनव्यवस्था बनाए रखने के लिए रासुका के तहत हिरासत में लिया गया और फिर जोधपुर जेल में भेज दिया गया. इसमें कहा गया है, सरकार लद्दाख के विभिन्न हितधारकों और सामुदायिक नेताओं के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है ताकि इस क्षेत्र के लोगों की चिंताओं का समाधान किया जा सके.

केंद्र ने बताया था मुख्य आरोपी

केंद्र ने शुरुआत में इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बताया कि राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले साल 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा में भीड़ को उकसाने वाले मुख्य आरोपी थे. केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ को बताया था कि वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन और हिंसा नियंत्रण में आ गई थी. केंद्र सरकार के वकील नटराज ने बेंच को बताया, वह हिंसा को मुख्य रूप से उकसाने वाले थे. इस हिंसा में चार लोग मारे गए थे और 60 लोग घायल हुए थे. हिरासत आदेश में स्पष्ट संबंध दिखता है, इसमें स्पष्ट रूप से सोची-समझी रणनीति का इस्तेमाल किया गया.

वांगचुक की पत्नी ने हिरासत को SC में दी चुनौती

इससे पहले वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने उनकी हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई के लिए 10 मार्च की तारीख तय की थी. इसके बाद कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या उनके भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट को वास्तव में भड़काऊ माना जा सकता है और क्या उनका 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा से कोई सीधा संबंध है.

170 दिन से जेल में हैं सोनम

दरअसल, सोनम के अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह हिंसा हुई थी. दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था. इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था. 170 दिन से वे जोधपुर जेल में हैं। अब उनकी रिहाई होगी. वहीं जोधपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत ने बताया, ‘उन्हें भी प्रेस नोट के जरिए ही इसकी सूचना मिली है। अभी तक किसी तरह का कोई ऑर्डर नहीं मिला है। ऑर्डर आने के बाद जेल नियम के हिसाब से आगे की कार्यवाही की जाएगी.

जानें सरकार ने अब क्या कहा?

केंद्र सरकार ने अब वांगचुक की हिरासत को रद्द करने का फैसला लिया है. गह मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया है. सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद को सुगम बनाया जा सके. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए और उचित विचार-विमर्श के बाद, सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया है.

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