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Mumbai Dabbawala Crisis: LPG किल्लत से जूझ रही मुंबई की 135 साल पुरानी ‘डिब्बा सर्विस’, रोजगार पर संकट

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की पहचान माने जाने वाला मुंबई डब्बावाला एसोसिएशन इन दिनों एक बड़े संकट से गुजर रहा है. करीब 135 साल पुरानी यह अनोखी टिफिन डिलीवरी सेवा, जो अपनी सटीक टाइमिंग और बेहतरीन प्रबंधन के लिए दुनियाभर में फेसम है. अब एलपीजी गैस की कमी के कारण प्रभावित हो रही है.

मुंबई के डब्बेवाले सिर्फ एक डिलीवरी सिस्टम नहीं, बल्कि अनुशासन, भरोसे और समर्पण का प्रतीक माने जाते हैं. उनकी कार्यप्रणाली को मैनेजमेंट की पढ़ाई में केस स्टडी के तौर पर शामिल किया जाता है. यहां तक कि यूके के किंग चार्ल्स थर्ड ने भी अपने मुंबई दौरे के दौरान डब्बेवालों से मुलाकात कर उनकी कार्यशैली की तारीफ की थी. 

एलपीजी सिलेंडर की कमी से संकट में डब्बावाला

मौजूदा हालात ने इस ऐतिहासिक व्यवस्था को झकझोर दिया है. एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण शहर के कई छोटे मेस, किचन और टिफिन बनाने वाले केंद्र बंद होने लगे हैं. इसका सीधा असर डब्बेवालों के काम पर पड़ रहा है. पहले जहां रोजाना बड़ी संख्या में टिफिन डिलीवर किए जाते थे. अब उसमें लगातार गिरावट हो रही है.

डब्बेवालों का कहना है कि गैस की कमी के चलते घरों में भी खाना बनना प्रभावित हुआ है, जिससे घर से आने वाले टिफिन की संख्या कम हो गई है. इसका असर उनकी आमदनी पर साफ तौर पर पड़ रहा है. दशकों से बिना रुके चलने वाली यह सेवा अब संसाधनों की कमी के कारण धीमी पड़ रही है.

खड़ा हो सकता है रोजी-रोटी का संकट

टीवी9 भारतवर्ष ने जब डब्बेवालों से बातचीत की, तो उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अगर जल्द ही एलपीजी संकट का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो हमारी पूरी व्यवस्था बाधित हो जाएगी और रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

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