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मध्यप्रदेश

Satpura Tiger Reserve: मरे बैल के मांस में यूरिया मिलाकर बाघ का शिकार, 24 दिन बाद मिला शव, 5 गिरफ्तार

नर्मदापुरम: सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बांघों की सुरक्षा में लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां कॉलर आईडी वाले एक बाघ का 24 दिन पुराना शव मिला है. वन विभाग की टीम ने हत्या के आरोप 5 लोगों को गिरफ्तार किया है. सभी आरोपी की पहचान स्थानीय निवासी के रूप में हुई है. अंदेशा जताई जा रही है कि अवैध अफीम की खेत की तरफ बार-बार बाघ के जाने से आरोपियों के मन में वन विभाग के पहुंचे की आशंका हुई. जिससे घबराकर आरोपियों ने बाघ की हत्या कर दी.

बाघ को मारकर रेडियो कॉलर जलाकर किया नष्ट

जानकारी के अनुसार, छिंदवाड़ा जिले की सीमा पर सांगाखेड़ा गांव के करीब छातीआम बीट में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कॉलर आईडी वाले बाघ का 24 दिन पुराना शव शुक्रवार (27 मार्च) को मिला था. इतने दिनों तक बाघ की कोई खोज खबर नहीं ली गई. डब्ल्यू डब्ल्यू एफ संस्था द्वारा कुछ दिन पहले बाघ की कॉलर आईडी हटाने की परमिशन दी गई थी. तब एसटीआर प्रबंधन ने बाघ की जगह कॉलर आईडी की खोज शुरु की, लेकिन उससे पूर्व शिकारियों द्वारा रेडियो कॉलर जलाकर नष्ट कर दी गई थी. आरोप है कि बाघ को जहर देकर मार दिया था.

अफीम की खेती छुपाने के लिए मारा बाघ

बाघ के शिकार मामले में पकड़े गए 5 आरोपियों ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि, बाघ द्वारा हमारे बैल को मार दिया गया था, हमने मरे बैल के मांस में यूरिया डाल दिया था. जिससे दोबारा खाने पर बाघ की मौत हो गई. हालांकि आरोपियों के पास से टीम ने कीटनाशक भी जब्त किया है.

वन विभाग के पहुंचने का शता रहा था डर

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि, बाघ को मारने के बाद कुछ ही दूरी पर शव को गड्ढा खोदकर दफना दिया. बाघ की कॉलर आईडी निकाल कर उसे जला दी गई, जिससे कि सही लोकेशन ना मिल पाए. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि, इस पूरे मामले में आरोपी अपनी जमीन पर अवैध रूप से लगाई गई अफीम की खेती छुपाना चाहते थे. बाघ के बार-बार उनके खेत के आसपास मौजूद रहने के कारण आरोपियों को वन विभाग के आने का डर लगा हुआ था. प्रमुख रूप से अफीम की खेती छुपाने के लिए बाघ को मारा गया है.

बांधवगढ़ लाया गया था टाइगर

करीब चार साल के नर बाघ को दो साल पहले बांधवगढ़ से लाकर चूरना के जंगल में छोड़ा गया था. इस दौरान बाघ को रेडियो कॉलर भी लगाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद बाघ मटकुली के देनवा क्षेत्र में आ गया. यहां से वह पचमढ़ी के जंगल में घूमता रहा. कुछ समय से टाइगर छिंदवाड़ा जिले की सीमा के जंगल को रहवास बना चूका था. यहां बाघ को पानी और मवेशी आसानी से उपलब्ध हो रहे थे.

चार दिन पहले शुरू हुई खोजबीन

डब्ल्यू डब्ल्यू एफ संस्था द्वारा 19 मार्च को कॉलर आईडी ड्राप करने की अनुमति मिली. लेकिन बाघ की लोकेशन नहीं मिल रही थी. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने कॉलर आईडी अपने आप गिरना मानकर बाघ की खोज नहीं की. लेकिन कॉलर आईडी खोजने के लिए एक टीम चार दिन पहले बनाई गई. बाघ के लास्ट लोकेशन वाले स्थान पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और छिंदवाड़ा पश्चिमी वन मंडल की टीम शुक्रवार को पहुंची. मौके पर एक मृत बैल मिला, जिससे शिकार की आशंका हुई, डॉग स्क्वाड के सहारे टीम आरोपियों तक पहुंची और बाघ के शव को बरामद किया.

सभी आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

टीम ने शिकार करने वाले मुख्य आरोपी छातीआम निवासी उदेसिंग (50) से सख्ती से पूछताछ की तो उसने शिकार में शामिल दूसरे आरोपियों की जानकारी दी. जिसके बाद टीम ने आरोपी बिशनलाल शीलू (30), मनोहर (60), कैलाल (65), मानकसिंग को गिरफ्तार किया है.

रियल टाइम मॉनिटरिंग में लापरवाही के आरोप

पचमढ़ी की वादियों में लंबे समय से घर बना कर रह रहे कॉलर आईडी वाले बाघ के शिकार होने पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. क्योंकि बाघ की रियल टाइम मॉनिटरिंग नहीं की गई. इतनी बड़ी घटना की जानकारी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन को समय पर नहीं लगी. बाघ की मौत के 24 दिन बाद कॉलर आईडी की खोज की गई. जबकि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन के एक पशु चिकित्सक के पास बाघ की मॉनिटरिंग का प्रभार था. लेकिन संबंधित कर्मचारी ने पूरे मामले में लापरवाही बरती. बाघ के कॉलर आईडी की सही लोकेशन की जानकारी अधिकारियों को नहीं दी.

संरक्षण व्यवस्था की कमजोरियां उजागर

वन्यजीव विशेषज्ञ अजय दुबे ने कहा, “बाघ के गले में कॉलर लगा था तो उसकी मूवमेंट की मॉनिटरिंग नियमित रूप से होनी चाहिए थी. ऐसे में उसकी मौत की सूचना देर से मिलना और घटना का रेवेन्यू क्षेत्र में होना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है. यह घटना एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष और संरक्षण व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है.”

अनदेखी से जान गवां चुके बाघ

21 जनवरी 2026 को सामान्य वन मंडल की सोनतलाई बीट में बाघिन की संदिग्ध मौत हुई, लेकिन वन अधिकारी अभी तक वैज्ञानिक पुष्टि नहीं कर पाए. जंगलों के आसपास शिकारियों की मौजूदगी बाघिन का शिकार होने की तरफ इशारा कर रही थी. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगल में सितंबर 2025 में संदिग्ध शिकारी कैमरे में कैद हुए थे. चार कैमरे चोरी करके ले गए.

वन कर्मियों को बंदूक दिखाकर शिकारी हुए फरार

22 अगस्त 2025 में शिकारी तवा नदी के किनारे एक बाघ पंजा काटकर ले गए. बाघ कहां शिकार हुआ यह अधिकारी आज तक पता नहीं कर पाए. मई 2025 में बंदूकधारी शिकारियों ने सांभर का शिकार किया था. वनकर्मियों को बंदूक दिखाकर शिकारी भागे.

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया, “दिसंबर से बाघ की कॉलर आईडी निकालने के प्रयास किया जा रहे थे, लेकिन व्यस्तता के कारण ऐसा नहीं हो पाया. कुछ दिन पहले डब्ल्यू डब्ल्यू एफ ने कॉलर ड्राप करने के लिए पत्र लिखा था, इसके बाद हमने एक टीम भेज कर कॉलर आईडी की लोकेशन खोजी तो बाघ के शिकार की जानकारी सामने आई. सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. पूरे मामले की जांच की जा रही है.”

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