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मध्यप्रदेश

ड्राइंग रूम में सजाने के लिए लोगों में मची होड़! 1000 साल पुरानी इन 2 मूर्तियों की रिप्लिका ने तोड़े बिक्री के रिकॉर्ड

भोपाल: मध्य प्रदेश में अलग-अलग स्थानों से मिली 2 प्राचीन प्रतिमाएं अपनी खूबसूरती के लिए अब खरीदारों के बीच भी छाई हुई हैं. 10वीं सदी की प्रख्यात प्रतिमा शालभंजिका पहले से ही लोगों को आकर्षित करती आई है. 11 देशों में प्रदर्शित हो चुकी इस प्रतिमा की रिप्लिका की खूब बिक्री होती है, लेकिन एक अन्य प्रतिमा की बिक्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कनेक्शन के बाद बढ़ी है.

मंदसौर से प्राप्त हुई 11वीं शताब्दी की नरवराह की प्रतिमा की डिमांड बढ़ी है. पिछले एक साल में इन दोनों प्रतिमाओं की करीब 5 हजार रिप्लिका सेल हो चुकी हैं. यह अब ऑनलाइन भी बेची जा रही हैं.

पीएम मोदी को गिफ्ट के बाद बढ़ी डिमांड

पिछले साल 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मध्य प्रदेश के धार पहुंचे थे. इस दिन उनका जन्मदिन भी था. प्रधानमंत्री के स्वागत में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 11वीं सदी की मंदसौर से मिली नरवराह की प्रतिमा की रिप्लिका भेंट की थी. इसके बाद यह रिप्लिका चर्चा में आ गई.

भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा की डिमांड

पुरातत्व विभाग के मॉडलिंग शाखा के प्रभारी आशुतोष उपरित बताते हैं कि “नरवराह की प्रतिमा में भगवान विष्णु का वराह अवतार दिखाया गया है. प्रधानमंत्री को यह भेंट किए जाने के बाद इसकी जबरदस्त डिमांड बढ़ी है. प्रतिमा की रिप्लिका लगातार बिक रही है. वे कहते हैं कि वैसे मध्य प्रदेश की सबसे अद्भुत और खूबसूरत प्रतिमा 10वीं शताब्दी की शालभंजिका है, जो 11 देशों में प्रदर्शित हो चुकी है और अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में सराही जा चुकी है. इसे इंडियन मोनालिसा और मास्टर पीस ऑफ आर्ट्स के नाम से भी जाना जाता है.”

‘ओरिजनल जैसी मजबूत प्रतिमाएं हो रहीं तैयार’

पुरातत्व विभाग के मॉडलिंग शाखा के प्रभारी आशुतोष उपरित बताते हैं कि “प्राचीन प्रतिमाओं की प्रतिकृति तैयार करने के लिए मूल प्रतिमा से उसका मोल्ड तैयार किया जाता है और इसके बाद उसकी प्रतिमाएं तैयार होती हैं. पूर्व में पीओपी से प्रतिमाएं तैयार होती थीं, हालांकि इससे इनकी कीमत जरूर कम होती थी, लेकिन फिनिशिंग नहीं आती.

इसको देखते हुए अब पीओपी के अलावा दो अन्य तरीके से भी प्रतिकृतियां तैयार की जा रही हैं. अब डेंटल पीओपी और स्टोन पाउडर (रेजन) से भी प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं. स्टोन पाउडर से तैयार प्रतिमाएं बेहतर मजबूत होती हैं. इसी तरह डेंटल पीओपी से तैयार प्रतिमाओं का वजन कम होता है और इसकी फिनिशिंग बहुत शानदार होती है, हालांकि इसके साथ इनकी कीमत पर भी असर आता है. इन प्रतिमाओं को ऑनलाइन भी बेचा जा रहा है.”

56 प्राचीन प्रतिमाओं की तैयार हो रही प्रतिकृतियां

पुरातत्व विभाग द्वारा प्रदेश में अलग-अलग स्थानों से प्राप्त हुई प्राचीन प्रतिमाओं की प्रतिकृतियां (रिप्लिका) तैयार की जा रही हैं. इनमें से कई प्रतिमाह 1 हजार साल से भी ज्यादा पुरानी हैं. यह प्रदेश में कई स्थानों से मिली हैं. इनमें विदिशा के ग्यारसपुर में मिली शालभंजिका है, इसको इंडियन मोनालिसा कहा जाता है. इसके पीछे इसकी मुस्कान है. यह प्रतिमा ग्वालियर के गुजरी महल म्यूजियम में स्थापित है.

पुरातत्व विभाग इस प्रतिमा की अलग-अलग साइज में प्रतिकृतियां तैयार कर ऑनलाइन भी बेच रहा है. इसके अलावा भिंड के बरहद में मिली 11वीं सदी की गणेश (ललितसेन), 10वीं सदी की मुरैना से मिली सरस्वती, विदिशा से मिली दूसरी शताब्दी की कुबेर की प्रतिमा भी इसमें शामिल है. इसके अलावा 11वीं सदी की ब्रम्हाणी, बुद्धा, योग विष्णु, द्वार शिखर, गौतम बुद्ध, हरिहर, गौरी, कार्तिकेय, कामधेनु, कृष्ण जन्म, लवकुश, नवगृह, मिथुन जैसी कई प्राचीन प्रतिमाओं की प्रतिलिपी तैयार की जा रही है.

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