ब्रेकिंग
Gulmarg Accident: बारामूला में शेल फटने से बड़ा हादसा; मृतक की पहचान हुई, प्रशासन ने झूठी खबरों के खि... PM Modi Seychelles Visit: सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी; हिंद महासागर में भारत की बढ़ेगी र... Delhi BJP Organization: दिल्ली भाजपा ने 11 संगठनात्मक जिलों की नई टीम घोषित की; 33% महिलाओं को मिला ... Delhi Police Controversy: आदर्श नगर में पुलिस सब-इंस्पेक्टर पर महिलाओं को थप्पड़ मारने का आरोप; CCTV... Pakistan Mobile Network in J&K: जम्मू-कश्मीर सीमा के अंदर आ रहे पाकिस्तानी मोबाइल सिग्नल; सुरक्षा एज... Datia News: दतिया के मंदिर में ताजियों की सलामी; 200 साल पुरानी परंपरा से दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता की... Kanpur Crime News: महंत पर हमले का आरोपी हिस्ट्रीशीटर अजय ठाकुर गिरफ्तार? वायरल वीडियो से मचा हड़कंप Bareilly Accident News: कार रोकने के प्रयास में किसान की दर्दनाक मौत; घर के बाहर ढलान पर फिसल गई थी ... Noida Authority New Office: CM योगी आदित्यनाथ ने किया नोएडा के नए हाईटेक प्रशासनिक भवन का लोकार्पण; ... Mumbai Muharram Case: मुंबई में मोहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा खुलासा; जहरीले कैप्सूल बांटने वाला गिरफ्त...
व्यापार

ITAT का बड़ा फैसला: विदेशी संपत्ति पर लगा ₹10 लाख का जुर्माना हटाया, जानें ब्लैक मनी एक्ट के इस केस में क्या थी कोर्ट की टिप्पणी

विदेशी संपत्तियों की जानकारी ITR में न देने पर लगे भारी जुर्माने के एक अहम मामले में Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) चेन्नई ने करदाता को बड़ी राहत दी है. ट्रिब्यूनल ने 10 लाख रुपये का जुर्माना रद्द करते हुए कहा कि यह गलती जानबूझकर नहीं थी, बल्कि नियमों की शुरुआती अस्पष्टता के कारण हुई थी.

क्या है पूरा मामला?

मामला एक ऐसे कर्मचारी से जुड़ा है, जो विदेश में Vedanta Limited के साथ काम कर रहा था. इस दौरान उसे कंपनी की पैरेंट फर्म Vedanta Resources PLC से ESOP (एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन) मिले. ये शेयर एक फिड्यूशियरी स्ट्रक्चर के जरिए मैनेज किए जा रहे थे.

करदाता ने आकलन वर्ष 2016-17 के लिए 22 फरवरी 2018 को ITR दाखिल किया, लेकिन उसने Foreign Assets (FA) शेड्यूल में इन ESOP शेयरों का खुलासा नहीं किया. इसी आधार पर आयकर विभाग ने Black Money Act 2015 के तहत सेक्शन 43 के अंतर्गत 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया.

अपील के बाद भी नहीं मिली राहत

शुरुआत में करदाता ने कमिश्नर (अपील) के पास मामला उठाया, लेकिन वहां भी जुर्माना बरकरार रखा गया. इसके बाद मामला ITAT चेन्नई पहुंचा, जहां करदाता की ओर से चार्टर्ड अकाउंटेंट ने पक्ष रखा.

ITAT में क्या रखे गए तर्क?

करदाता की ओर से कहा गया कि:

  • ESOP नौकरी के हिस्से के रूप में मिले थे और उन पर TDS कट चुका था
  • बाद में शेयर बेचने पर हुए कैपिटल गेन पर भी टैक्स दिया गया
  • यानी पूरी आय टैक्स के दायरे में थी, कोई छिपाव नहीं था
  • FA शेड्यूल में जानकारी न देना एक तकनीकी और अनजाने में हुई गलती थी

साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि उस समय विदेशी संपत्ति की रिपोर्टिंग का नियम नया था, जिससे भ्रम की स्थिति बनी.

ITAT का फैसला और टिप्पणी

ITAT चेन्नई ने 1 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए माना कि:

  • करदाता ने कोई आय छिपाने या टैक्स चोरी की कोशिश नहीं की
  • केवल विदेशी संपत्ति का खुलासा करना छूट गया
  • यह एक बोना फाइड यानी ईमानदार गलती थी

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि सेक्शन 43 में may शब्द का इस्तेमाल हुआ है, जिससे यह साफ है कि जुर्माना लगाना अनिवार्य नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार तय किया जाता है.

क्या है इसका मतलब?

इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि अगर करदाता से कोई तकनीकी गलती हो जाए और उसमें गलत इरादा न हो, तो हर बार भारी जुर्माना नहीं लगाया जा सकता. खासकर तब, जब संबंधित आय पहले ही टैक्स के दायरे में आ चुकी हो.

Related Articles

Back to top button