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रिश्वत के नशे में पुलिस ने पकड़ा था गांजा! पूर्व एसएसपी किशोर कौशल के खिलाफ जांच शुरू

धनबाद। धनबाद पुलिस ने रिश्वत की मोटी रकम खाकर ईसीएलकर्मी चिरंजीत घोष को गांजा तस्करी के आरोप में जेल भेजा था। हालांकि जब तत्कालीन एसएसपी किशोर काैशल से लेकर निरसा थानेदार तक पर सवाल उठने लगे तो पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि घोष के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला है। इस मामले को सीआइडी मुख्यालय रांची ने गंभीरता से लेते हुए बोकारो के डीआइजी को जांच का निर्देश दिया है। तत्कालीन एसएसपी किशोर काैशल समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच को कहा गया है। इस मामले में किशोर काैशल फंस सकते हैं।

सीआइडी एडीजी के निर्देश पर धनबाद के पूर्व एसएसपी व वर्तमान में पीटीसी हजारीबाग में पोस्टेड आईपीएस अधिकारी किशोर कौशल व धनबाद पुलिस के अन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। धनबाद एसएसपी रहते हुए किशोर कौशल समेत अन्य अधिकारियों पर 40 किलो गांजा रख ईसीएलकर्मी चिरंजीत घोष को फंसाने का आरोप लगा था। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काम करनेवाले भाजपा नेता विनय कुमार सिंह ने इसकी शिकायत पुलिस मुख्यालय से की थी। पुलिस मुख्यालय को मिली शिकायत के आधार पर सीआईडी एडीजी अनिल पाल्टा ने जांच का आदेश दिया है। सीआईडी एडीजी ने बोकारो डीआईजी प्रभात कुमार को पत्र लिखकर आदेश दिया है कि शिकायत पत्र में दिए गए तथ्यों की पड़ताल कर मामले की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय व सीआईडी को सौंपें।

25 अगस्त, 2019 को धनबाद के निरसा में पुलिस ने एक सेवरले गाड़ी से 40 किलो गांजा बरामद किया था। इस मामले में धनबाद पुलिस ने ईसीएल कर्मी चिरंजित घोष को गांजा तस्करी का किंगपिन बताते हुए आरोपी बनाया था। धनबाद पुलिस ने इस मामले में चिरंजीत को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था। चिरंजीत के जेल भेजे जाने के बाद उसकी पत्नी ने तत्कालीन डीजीपी केएन चौबे समेत राज्य पुलिस के अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर इंसाफ की गुहार लगाई थी। चिरंजीत की पत्नी के मुताबिक उसके पति को बंगाल पुलिस के एक पुलिस अधिकारी के साजिश कर फंसाने का आरोप लगाया था । तब मुख्यालय स्तर से मामले की जांच कराए जाने के बाद यह साबित हुआ था की चिरंजीत को गलत तरीके से फंसा कर जेल भेजा गया था। पुलिस ने पोल खुलने के बाद कोर्ट में तथ्यों की भूल बताते हुए चिरंजीत को रिहा कराया था।

शुरू से निरसा थानेदार के सिर ठीकरा फोड़ने की तैयारी 

अमूमन ऐसे जांच में किसी छोटे अधिकारी को बलि का बकरा बनाया जाता है। इस मामले में भी यही होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। ठीकरा निरसा थानेदार पर फोड़ा जा सकता है। लेकिन, डीजीपी एमवी राव, सीआइडी के एडीजी अनिल पालटा, डीआइजी प्रभात कुमार और धनबाद के वर्तमान एसएसपी अखिलेश बी वारियर के ट्रैक को देखते हुए इंसाफ की उम्मीद बनती है। भाजपा नेता बिनय सिंह के शिकायत पर डीजीपी ने एडीजी सीआइडी को जांच सौंपा है। एडीजी सीआइडी ने बोकारो डीआइजी को जांच करने को कहा है और डीआइजी ने धनबाद एसएसपी से रिपोर्ट मांगी है। बिनय सिंह का कहना है की जिन व्यक्तियों ने टवेरा गाड़ी में गांजा भरकर धनबाद के आए उनका नाम क्रमशः तिवारी और ठाकुर है और दोनो बाघमारा छेत्र के रहने वाले है। इन दोनो से पूछताछ से ही पता चलेगा कि धनबाद में गांजा पहुंचाने का आदेश उनको किसने दिया था।

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