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What is Digital Arrest Scam: क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम? 81 साल के बुजुर्ग ने ऐसे बचाए बेटे के 12 लाख रुपये

भारत में बढ़ते Digital Arrest Scam को लेकर ऑनलाइन अभियान में दी जाने वाली चेतावनियों के बावजूद, पूरे देश में नकली पुलिस से आने वाले कॉल से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं. हाल ही में पुणे में एक मामला सामने आया है जिसमें 81 वर्षीय एक पिता ने ठीक समय पर स्कैम को रोक बेटे को स्कैमर्स के जाल में फंसने से बचा लिया. आइए आपको बताते हैं कि कैसे एक पिता की सूझबूझ से बेटा स्कैमर्स के जाल से बच गया?

क्या है डिजिटल अरेस्ट?

ये एक तरह का स्कैम है, जिसमें जालसाज पुलिस या सरकारी अधिकारी होने का दिखावा कर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ले लेते हैं. ठगी करने वाले फोन कॉल या WhatsApp और Signal जैसे ऐप्स के जरिए संपर्क करते हैं और झूठा दावा करते हैं कि वह व्यक्ति किसी गंभीर अपराध में शामिल है जैसे कि ड्रग्स की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध पार्सल.

इसके बाद जालसाज कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की धमकी देते हैं और अक्सर पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर करते हैं, जिसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है. इसके बाद पीड़ित को इस बात की भी चेतावनी दी जाती है कि वह किसी से भी इस बारे में बात न करें. असल में, डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं है. भारत में पुलिस फोन या वीडियो कॉल के जरिए लोगों को गिरफ्तार नहीं करती है. यह पूरी तरह से जालसाजों द्वारा दहशत और दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक चाल है.

जैसे ही आप डर जाते हैं तो स्कैमर इसका फायदा उठाते हैं और आपसे आधार, बैंक की जानकारी या OTP जैसी निजी जानकारी मांगते हैं. इसके बाद केस बंद करने के नाम पर पैसे की मांग करते हैं. इसमें स्कैमर का टारगेट होता है किॉ लोगों को डराकर पैसे ट्रांसफर करवाना.

पिता ने बेटे को ऐसे बचाया

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 81 वर्षीय पिता का बेटा पेश से केमिकल इंजीनियर है, 19 अप्रैल सुबह 11 बजे एक अनजान नंबर से WhatsApp कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम से आया एक पार्सल जब्त किया गया है. आरोप था कि उस पार्सल में पासपोर्ट और नशीले पदार्थ थे.

पीड़ित ने उस पार्सल से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया, लेकिन लड़के पर दबाव बनाया जाना शुरू हो गया. इस लड़के को बताया गया कि इस मामले में एक उच्च-स्तरीय जांच शुरू की जाएगी. इसके कुछ ही देर बाद, उन धोखेबाजों ने लड़के और उसकी पत्नी को Signal ऐप इंस्टॉल करने और एक वीडियो कॉल में शामिल होने के लिए कहा.

कॉल के दौरान, एक आदमी पुलिस अधिकारी की वर्दी पहने हुए स्क्रीन पर दिखाई दिया. ठगी करने वाले इस व्यक्ति ने आरोपों को दोहराते हुए चेतावनी दी कि वह किसी के साथ भी कोई जानकारी शेयर न करें. इसके बाद घंटों तक कॉल पर ही रखा गया और मानसिक दबाव डाला गया.

जालसाजों ने आधार की जानकारी और बैंक डिटेल्स मांगीं, उन्होंने 12 लाख रुपए की मांग की और कहा कि पैसे देने के बाद केस बंद कर दिया जाएगा. पीड़ित के पिता को कुछ गड़बड़ लगी, अपने बेटे को तनाव में देखकर, उन्होंने बीच में दखल दिया, तब परिवार को एहसास हुआ कि यह एक स्कैम है. उन्होंने तुरंत कॉल काट दिया और पुलिस को सूचना दी. पिता की सूझबूझ और तुरंत कार्रवाई की वजह से इस केस में 12 लाख रुपए ठगी करने वालों के पास जाने से बच गए.

Digital Arrest Scam से कैसे बचें?

  • आपको फोन या वीडियो कॉल पर अरेस्ट करने की धमकी मिले तो तुरंत कॉल काट दें.
  • असली पुलिस अधिकारी आपसे कॉल पर बने रहने या WhatsApp या Signal जैसे ऐप्स के जरिए जांच के लिए नहीं कहेगा.
  • कॉल के दौरान किसी अनजान व्यक्ति से निजी या वित्तीय जानकारी (आधार नंबर, बैंक डिटेल्स, OTP या पासवर्ड) शेयर न करें.
  • कॉल करने वाला खुद को पुलिस, CBI या किसी अन्य अथॉरिटी से होने का दावा करता है, तो समझ जाएं कि आपको फंसाया जा रहा है. तुरंत कॉल काटें और नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें.
  • ऐसी घटनाओं को साइबर क्राइम हेल्पलाइन या आधिकारिक पोर्टल पर जाकर रिपोर्ट करें.

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