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छत्तीसगढ़

नारायणपुर: खराब सड़क के खिलाफ सड़क पर उतरे ग्रामीण, चक्काजाम से आवाजाही ठप

नारायणपुर: जिले के ग्राम मारकाबेड़ा में एक बार फिर ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है. नारायणपुर–ओरछा मुख्य मार्ग की बदहाल और जर्जर स्थिति को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है. सड़क की दुर्दशा, खनन वाहनों की आवाजाही, धूल-धक्कड़ और लगातार हो रही दुर्घटनाओं से त्रस्त ग्रामीणों ने चक्का जाम कर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उनका साफ कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

गर्मी में धूल से और हालत खराब

मारकाबेड़ा गांव इन दिनों आंदोलन का केंद्र बन गया है, जहां ग्रामीणों ने नारायणपुर-ओरछा मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया है. यह वही सड़क है जो क्षेत्र के लिए जीवन रेखा मानी जाती है, लेकिन आज इसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां चलना किसी खतरे से कम नहीं है. ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई परत और उड़ती धूल ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है.

माइंस की गाड़ी चल रही, बच्चों को जान जोखिम में

विशेष रूप से खनन (माइंस) से जुड़े भारी-भरकम मालवाहक वाहनों की लगातार आवाजाही ने सड़क की स्थिति को और भी बदतर बना दिया है. नतीजा यह है कि जहां पहले आधे घंटे में पूरा होने वाला सफर अब दो-दो घंटे में तय हो रहा है. सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली बच्चे और मरीज हैं.

कई किलोमीटर दूर स्कूल जाने वाले बच्चे रोजाना जोखिम उठाने को मजबूर हैं. धूल और खराब सड़क के कारण बच्चे न सिर्फ देर से पहुंचते हैं, बल्कि कई बार दुर्घटनाओं का शिकार भी हो जाते हैं– पंडी राम वड्डे, ग्रामीण

एंबुलेंस तक देर से पहुंचती है

वहीं, बीमार और घायल लोगों के लिए यह सड़क जानलेवा साबित हो रही है. कई बार एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंच पाती और पहुंचती भी है तो रास्ते में ही खराब हो जाती है, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है. ग्रामीणों ने स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है.

पीने के पानी में जमने लगी धूल

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क से उड़ने वाली धूल अब घरों तक पहुंच चुकी है. पीने के पानी में धूल जमने लगी है, कपड़े मटमैले हो रहे हैं और सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं. ग्रामीणों ने वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब यही पार्टी विपक्ष में थी, तब इसी सड़क को लेकर आंदोलन, सांकेतिक विरोध और प्रदर्शन किए जाते थे. लेकिन अब सत्ता में आने के बाद नेता गायब हैं.

पहले भी कई बार हम आंदोलन कर चुके हैं लेकिन प्रशासन सिर्फ आश्वासन देकर मामला शांत कर देता है. कुछ स्थानों पर टुकड़ों में सड़क बनाई गई, लेकिन पूरी सड़क की हालत आज भी खराब है.- रामशिला वड्डे, ग्रामीण महिला

काम शुरू होगा तो आंदोलन खत्म होगा

इस बार ग्रामीण पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे हैं. उनका कहना है कि जब तक मौके पर सड़क निर्माण सामग्री नहीं डाली जाती और मशीनरी तंत्र लाकर काम शुरू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा. आंदोलन के चलते खनन वाहनों का चक्का जाम हो गया है. सड़क के दोनों ओर लंबी कतारों में ट्रक खड़े नजर आ रहे हैं. साथ ही आम राहगीरों की आवाजाही भी पूरी तरह बाधित हो गई है.

ग्रामीण सिर्फ एंबलेंस को दे रहे रास्ता

राहत की बात यह है कि ग्रामीणों ने अपने आंदोलन के बीच भी मानवता का परिचय देते हुए एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाओं को रास्ता देना जारी रखा है. वहीं, जिला प्रशासन की ओर से नारायणपुर तहसीलदार मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा इस बार कुछ ज्यादा ही गहरा नजर आ रहा है.

हालात को देखते हुए यह साफ है कि बिना ठोस कार्रवाई के आंदोलन थमता हुआ नहीं दिख रहा. जर्जर सड़क, खनन का दबाव और प्रशासनिक उदासीनता ने ग्रामीणों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है.

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