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Ujjain News: उज्जैन की कांता गोयल ने पेश की इंसानियत की मिसाल, 350 अनाथ बच्चों को दिया मां का प्यार और सहारा

Mother’s Day Story: आज हम आपको उज्जैन की एक ऐसी मां की कहानी बताने जा रहे हैं, जिनके बेटे की बचपन में मौत होने के बाद कुछ दिनों तक तो उन्होंने उसके जाने का दुख मनाया, लेकिन बाद में वह ऐसे सेवा कार्य से जुट गई कि अब उनके एक दो नहीं बल्कि पूरे 350 बच्चे हैं. ये सभी उन्हें मां-मां कहकर पुकारते हैं और मां भी इन बच्चों के साथ कुछ इसी तरह से रहकर न सिर्फ उनके खाने-पीने और पहनने का ख्याल रखती है, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार मिले इसका भी पूरा ध्यान रखती है.

उज्जैन से लगभग 13 किलोमीटर दूर अंबोदिया गांव में सेवाधाम आश्रम है, जिसका संचालन सुधीर भाई गोयल के द्वारा किया जाता है. सुधीर भाई खुद तो सेवाभावी है ही, लेकिन उनकी धर्मपत्नी कांता गोयल भी सालों से उनके साथ सेवा कार्यों में लगी हुई है. सेवाधाम एक ऐसा स्थान है, जहां लगभग 1400 से अधिक दिव्यांग, अनाथ और असहाय लोग रहते हैं. वैसे तो कांता गोयल शुरुआत से ही मानव सेवा के काम में लीन रही है, लेकिन कुछ सालों पहले जब उनके बेटे अंकित की अचानक मौत हो गई तो उन पर दुखों का पहाड़ टूट गया था.

1400 लोगों का एक परिवार

चाहकर भी वे इस दुख से उबर नहीं पा रही थी, लेकिन बाद में उन्होंने आश्रम में रहने वाले 350 बच्चों को ही अपना सब कुछ मान लिया और अब वे यहां रहने वाले बच्चों की अपना बच्चे मानकर देखरेख करती है. सेवाधाम आश्रम में जाति और मजहब का कोई भेद नहीं है. यहां 1400 लोगों का परिवार एक साथ रहता है. इन लोगों में भी कुल 350 ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें समाज में ठुकरा दिया है. यह बच्चे सेवा धाम में रहते हैं.

गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चे

इन बच्चों में कोई टीवी, कोई एचआईवी, कोई दिव्यांग तो कोई मानसिक बीमारी से पीड़ित है. बेसहारों का सहारा सेवाधाम इन बच्चों को अपने संरक्षण में रखता है. उनका इलाज करवाता है और कांता गोयल इन बच्चों को अपने बच्चों की तरह प्यार और स्नेह प्रदान करती है. भले ही कांता गोयल का इन बच्चों से खून का कोई रिश्ता ना हो, लेकिन मानवता के नाते वह इन सभी बच्चों का सगे संबंधियों से भी ज्यादा ख्याल रखती है.

कांता गोयल बनीं मिसाल

वह नन्हे-मुन्ने बच्चों को अपनी गोदी में लेकर दुलार करती है, तो वही बड़े बच्चों से उनकी रुचि जानने के बाद उनकी शिक्षा दीक्षा में मदद करती हैं और यहां प्रयास करती है कि यह बच्चे अच्छे कार्य करें और आत्मनिर्भर बनकर पूरे देश में अपना नाम करें. वैसे तो कांता गोयल की उम्र लगभग 60 वर्ष है, लेकिन वह इन बच्चों के बीच इतनी घुल मिल जाती है कि वह कभी बच्चों के साथ उनके पसंदीदा खेल खेलती दिखाई देती है तो कभी उनके साथ गाने गाते हुए और भजन करते हुए.

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