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मध्यप्रदेश

Biaora Railway Station: चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिरी महिला, जवानों ने देवदूत बनकर बचाई जान

राजगढ़/ ब्यावरा। कहते हैं ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोए’… ब्यावरा रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर-2 गुरुवार को एक ऐसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना का गवाह बना। चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश के दौरान एक मां अपने मासूम बच्चों के सामने सीधे पटरियों और प्लेटफॉर्म के बीच के गहरे अंधेरे (गैप) में समा गई। स्टेशन पर चीख-पुकार मच गई, लगा कि सब खत्म हो गया… लेकिन तभी वहां मौजूद खाकी के जवानों ने देवदूत बनकर मौत को मात दे दी।

😨 खुशियां पल भर में बदलीं दहशत में: भाई की शादी में जा रही थी मां

नरसिंहगढ़ (रामकुंड मोहल्ला) की रहने वाली 40 वर्षीय नजमा बी अपने दो मासूम बच्चों का हाथ थामे अशोकनगर में अपने भाई की शादी में शामिल होने के लिए निकली थीं। ब्यावरा स्टेशन पर जैसे ही साबरमती एक्सप्रेस (19165) आकर रुकी, जनरल कोच में चढ़ने की आपाधापी शुरू हो गई। नजमा ने जैसे ही पायदान पर पैर रखा, अचानक ट्रेन गति पकड़ने लगी। रफ्तार के साथ नजमा का संतुलन बिगड़ा, पैर फिसला और वे सीधे प्लेटफॉर्म और चलती ट्रेन के बीच के खौफनाक गैप में नीचे गिर गईं।

📢 प्लेटफॉर्म पर मची अफरा-तफरी: बच्चों की चीख से कांप उठा कलेजा

“अम्मी… अम्मी…” ट्रेन के भीतर से बच्चों की चीखें गूंज उठीं और प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों का कलेजा कांप गया। ट्रेन आगे बढ़ रही थी और नजमा नीचे पटरियों के पास जिंदगी के लिए छटपटा रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो वह मंजर ऐसा था कि चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई थी। हर कोई स्तब्ध था कि अब क्या होगा, तभी सुरक्षा बल के जवान हरकत में आए।

👮 देवदूत बने खाकी के जांबाज: जवानों ने अपनी जान पर खेलकर बचाई जान

उसी वक्त प्लेटफॉर्म पर सघन चेकिंग कर रहा जीआरपी और आरपीएफ का स्टाफ इस चीख-पुकार को सुनकर बिजली की तेजी से दौड़ा। जीआरपी के प्रधान आरक्षक दीपचंद माली, अजय यादव, आरक्षक राहुल सिंह और आरपीएफ के के.आर. डेविड व आर. पूरणमल ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मोर्चा संभाला। एक तरफ चिल्लाकर ट्रेन को रुकवाने का इशारा किया गया, तो दूसरी तरफ जवानों ने अपनी मजबूत बाहों को ट्रेन के नीचे फैलाकर नजमा को कसकर पकड़ लिया।

🙏 सुरक्षित रेस्क्यू: दो सेकंड की देरी बन सकती थी बड़ी अनहोनी

कुछ ही सेकंड में यात्रियों की मदद से नजमा को सुरक्षित ऊपर खींच लिया गया। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था; अगर जवान दो सेकंड भी देर करते, तो पटरियों पर सिर्फ मातम बिखर जाता। सुरक्षित बाहर निकलने के बाद नजमा और उनके बच्चों ने भगवान के साथ-साथ पुलिस के इन जांबाज जवानों का बार-बार आभार जताया। स्टेशन पर मौजूद हर यात्री ने इन जवानों की बहादुरी की जमकर तारीफ की।

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