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पंजाब

PSPCL Meter Tender Controversy: पंजाब पावरकॉम के 1000 पावर क्वालिटी मीटर टेंडर पर उठे सवाल, CMD से बड़ी शिकायत

पटियाला: पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन (पी.एस.पी.सी.एल.) द्वारा हाल ही में एक हजार एम.क्यू.पी.-246 पावर क्वालिटी मीटरों की खरीद के लिए जारी किए गए टेंडर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह बड़ा टेंडर पावरकॉम द्वारा ‘जे.वी. सेल्स एंड सर्विसेज’ नामक कंपनी को आवंटित किया गया है। आरोप है कि इस कंपनी के मीटरों ने निर्धारित अनिवार्य टाइप टेस्ट पास नहीं किए हैं, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर इसे ठेका दे दिया गया। इस मामले के सामने आने के बाद बिजली विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है।

📜 सीएमडी को साक्ष्यों के साथ सौंपी गई लिखित शिकायत: अनिवार्य थर्ड पार्टी और शॉक टेस्ट फेल होने का दावा

इस पूरे प्रशासनिक और तकनीकी घालमेल के संबंध में मैसर्स एनर्जी इलेक्ट्रिकल पंचकूला द्वारा बाकायदा पी.एस.पी.सी.एल. के सीएमडी (CMD) को पत्र लिखकर साक्ष्यों सहित एक विस्तृत शिकायत सौंपी गई है। शिकायत के अनुसार, आई.ई.सी. 61000-4-30 ई.डी. 3.1 के तहत अनिवार्य रूप से आवश्यक ताजा टाइप टेस्ट, जिसमें अंडर/ओवर वोल्टेज डिविएशन टेस्ट भी शामिल है, कंपनी के पास उपलब्ध ही नहीं था। इसके अलावा कई अनिवार्य तृतीय पक्ष (थर्ड पार्टी) टेस्ट जैसे शॉक टेस्ट, ग्लो वायर टेस्ट, स्प्रिंग हैमर टेस्ट, वाइब्रेशन टेस्ट, ड्राई हीट टेस्ट और कोल्ड टेस्ट भी पास न होने की बात तकनीकी जांच में सामने आई है।

📉 बेंच टेस्टिंग के दौरान हैंग मोड में चला गया सीमेंस मीटर: वोल्टेज हार्मोनिक्स और महत्वपूर्ण डेटा मिला गायब

शिकायतकर्ता के अनुसार, बेंच टेस्टिंग के दौरान सीमेंस मीटर के कम वोल्टेज परिस्थितियों (6.35 वोल्ट, एच.टी. पी.टी. सेकेंडरी सिस्टम) में बुरी तरह फेल होने की आधिकारिक रिपोर्ट भी सामने आई है। लैब परीक्षण के दौरान यह मीटर अचानक हैंग मोड में चला गया और बार-बार अपने आप ऑन-ऑफ (रीबूट) होने लगा। इतना ही नहीं, बिजली की सटीक माप के लिए सबसे जरूरी माना जाने वाला वोल्टेज हार्मोनिक्स और इंटर-हार्मोनिक्स डेटा भी इस मीटर की रीडिंग से पूरी तरह गायब पाया गया।

📊 फील्ड टेस्टिंग में भी खुली पोल: गलत टी.एच.डी. कैलकुलेशन और अविश्वसनीय हार्मोनिक विश्लेषण की पुष्टि

इतना ही नहीं, शुरुआती फील्ड टेस्टिंग में भी इस मीटर में अंडर/ओवर वोल्टेज डिविएशन डेटा का भारी अभाव देखा गया। इसके साथ ही एस.ए.आई.-एफ.आई. व एस.ए.आई.-डी.आई. रिपोर्टों की अनुपस्थिति तथा आई.ई.ई.ई.-519 रिपोर्टों और मीटर के रॉ डेटा (Raw Data) में कई बड़े तकनीकी अंतर पाए गए। डी.ए.सी. द्वारा भी इस मीटर के गलत टी.एच.डी. कैलकुलेशन और अविश्वसनीय हार्मोनिक विश्लेषण की बात कही गई है, जो इसकी गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

💰 प्रति मीटर ₹50,000 अधिक भुगतान का आरोप: महज ₹300 कम दिखाकर एल-1 कंपनी को सौंप दी पूरी कमान

इस टेंडर के वित्तीय पक्ष पर बात करें तो सूत्रों ने बताया कि खरीदे गए मीटर की कीमत एल-2 (L-2) बोलीदाता की तुलना में लगभग 50,000 रुपए प्रति मीटर अधिक है। इसके बावजूद, कुल मिलाकर केवल 300 रुपए कम होने के तकनीकी आधार पर एल-1 (L-1) को पूरा टेंडर थमा दिया गया। इस मामले में विभाग के पास बातचीत (नेगोशिएशन) के जरिए सरकारी पैसा बचाने की पूरी संभावना थी। इसके बजाय पी.एस.पी.सी.एल. द्वारा ओ एंड एम (O&M) अवधि को 1 वर्ष से बढ़ाकर सीधे 5 वर्ष कर दिया गया और लगभग केवल 0.5 प्रतिशत की मामूली छूट दिखाई गई, जो करीब 2.70 लाख रुपए की कुल लागत में मात्र लगभग 1,650 रुपए की कमी बनती है।

⏳ स्थापित सप्लायरों को किया गया नजरअंदाज: दो महीने बाद भी डिलीवरी और टाइप टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार

इस टेंडर में 1000 पावर क्वालिटी मीटरों की थोक खरीद शामिल थी और पूरी मात्रा एक ऐसी कंपनी के मीटरों को दे दी गई जिसे तकनीकी रूप से गैर-अनुपालक (Non-compliant) बताया जा रहा है। इसके विपरीत, अन्य स्थापित सप्लायरों के पास पूर्ण टाइप टेस्ट रिपोर्ट, तैयार माल तथा पी.एस.पी.सी.एल. में ही 800 से अधिक एम.पी.क्यू. मीटरों की पूर्व सप्लाई का बेहतरीन अनुभव मौजूद था। सूत्रों के अनुसार, दो महीने से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बावजूद जिस कंपनी को ठेका दिया गया है, उसकी कई अनिवार्य टाइप टेस्ट रिपोर्ट अभी तक विभाग को उपलब्ध नहीं कराई गई हैं और पावरकॉम अभी भी इन रिपोर्टों तथा मीटरों की डिलीवरी का इंतजार कर रहा है।

⚠️ औद्योगिक उपभोक्ताओं को भारी नुकसान का खतरा: गलत रिकॉर्डिंग से बिजली बिलों में बढ़ सकता है बड़ा विवाद

इस बीच, अन्य प्रतिस्पर्धी सप्लायर जिनके पास पूरी तरह मानकों के अनुकूल तथा तत्काल उपलब्ध मीटर लगभग 50,000 रुपए कम कीमत पर स्टॉक में मौजूद थे, उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इस पूरे मामले ने अब एम.क्यू.पी. मीटर टेंडर की तकनीकी मूल्यांकन, परीक्षण और खरीद प्रक्रिया में गंभीर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप खड़े कर दिए हैं। आपको बता दें कि पावर क्वालिटी (पी.क्यू.) मीटर बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के परिसरों में हार्मोनिक स्तर और अन्य महत्वपूर्ण विद्युत मानकों की सटीक माप के लिए उपयोग किए जाते हैं। यदि गलत कैलकुलेशन और गलत रिपोर्ट देने वाले हार्मोनिक मीटर लगाए जाते हैं, तो फैक्ट्रियों और उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक व परिचालन नुकसान का खतरा हो सकता है तथा गलत रिकॉर्डिंग के कारण भविष्य में बिलिंग से जुड़े विभिन्न प्रकार के कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो सकते हैं।

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