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पंजाब

SGPC vs Punjab Government: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़े कानून में बदलाव पर भड़के हरजिंदर सिंह धामी; सरकार को दी बड़ी चेतावनी

अमृतसर: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पंजाब सरकार द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान और प्रबंधन से जुड़े कानून में किए गए हालिया बदलावों पर अत्यंत कड़ा एतराज जताया है। धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब सरकार ने श्री आनंदपुर साहिब में आयोजित असेंबली सेशन के दौरान साल 2008 के मूल एक्ट में कई बड़े बदलाव कर दिए, लेकिन इस बेहद संवेदनशील और धार्मिक मामले में सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि कमेटी और सर्वोच्च धार्मिक पीठ श्री अकाल तख्त साहिब से किसी भी प्रकार का ठीक से सलाह-मशविरा नहीं किया गया।

⚖️ सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के तहत SGPC के पास हैं खास अधिकार: सरकारी दखलंदाजी पर उठाए गंभीर सवाल

एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कानूनी और धार्मिक पक्षों को सामने रखते हुए कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पास ‘सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925’ के तहत पूर्ण और खास अधिकार सुरक्षित हैं। ऐसे में सिखों के आंतरिक और धार्मिक मामलों में सीधे तौर पर दखल देने के बजाय राज्य सरकार को कोई भी कदम उठाने से पहले एस.जी.पी.सी. (SGPC) और श्री अकाल तख्त साहिब के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी। उन्होंने साफ किया कि एस.जी.पी.सी. को बेअदबी के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा का प्रावधान करने पर कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि कमेटी ऐसे कदमों का स्वागत करती है, लेकिन एक्ट में जोड़ी जा रही कुछ नई धाराएं सीधे तौर पर धार्मिक प्रशासन और शिरोमणि कमेटी के स्वायत्त अधिकारों पर चोट करती हैं।

💻 वेबसाइट पर पावन स्वरूपों की जानकारी पब्लिक करने के नियम का विरोध: सुरक्षा के लिहाज से फैसला गलत

SGPC अध्यक्ष ने पंजाब सरकार द्वारा लागू किए जा रहे “कस्टोडियन” के नियम और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूपों की पूरी जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक (पब्लिक) करने के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। धामी ने बताया कि SGPC के पास पहले से ही पावन स्वरूपों के रखरखाव, छपाई और रिकॉर्डिंग के लिए पूरी तरह से आधुनिक और हाई-टेक डिजिटल सिस्टम मौजूद है। उन्होंने कहा कि हर स्वरूप के उचित रखरखाव, गुरुद्वारा परिसर के भौतिक निरीक्षण (Inspection), सीसीटीवी कैमरे, आग बुझाने के पुख्ता इंतजामों और ग्रंथी सिंहों की पुष्टि के बाद ही मर्यादा के तहत स्वरूप सौंपे जाते हैं। ऐसे में अगर इन स्वरूपों की पूरी लोकेशन और जानकारी वेबसाइट पर डाल दी जाती है, तो यह सुरक्षा के नजरिए से बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

🪶 ‘सिख रहत मर्यादा’ एक विशुद्ध धार्मिक विषय: दमदमा साहिब के बाद अब बाबा बकाला साहिब में जुटेगा सिख पंथ

धामी ने जोर देकर कहा कि “सिख रहत मर्यादा” पूरी तरह से एक आध्यात्मिक और धार्मिक विषय है। इससे जुड़े तमाम नीतिगत और पंथिक फैसले केवल और केवल श्री अकाल तख्त साहिब के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, न कि किसी सरकारी कानूनी या विधायी प्रक्रिया के तहत। इस गंभीर मुद्दे को लेकर पहले तख्त श्री दमदमा साहिब में एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें अलग-अलग सिख संप्रदायों, गुरुद्वारा कमेटियों और सिंह सभाओं ने हिस्सा लिया था। अब इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आगामी 31 तारीख को गुरुद्वारा श्री बाबा बकाला साहिब के ऐतिहासिक परिसर में एक बहुत बड़ी पंथिक कॉन्फ्रेंस (Panthic Conference) बुलाई गई है।

🤝 धार्मिक अधिकारों और संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा का संकल्प: सरकार से आपत्तिजनक धाराएं वापस लेने की अपील

31 तारीख को होने वाली इस विशाल पंथिक सभा में देश भर के सभी प्रमुख सिख संगठनों, निहंग सिंह जत्थेबंदियों, दमदमी टकसाल, निर्मल संप्रदाय और दूसरी बड़ी धार्मिक संस्थाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि यह सभा किसी भी राजनीतिक टकराव या झगड़े के लिए नहीं है, बल्कि यह सिख धर्म के मौलिक अधिकारों और सिख संस्थाओं की ऑटोनॉमी (स्वायत्तता) की रक्षा करने के संकल्प के साथ बुलाई जा रही है। उन्होंने पंजाब सरकार से पुरजोर अपील की है कि वह कानून में जोड़ी गई इन सभी आपत्तिजनक और दखल देने वाली धाराओं को तत्काल प्रभाव से वापस ले और सिखों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करे।

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