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मध्यप्रदेश

Jabalpur Jain Samaj: रीवा हादसे के विरोध में जबलपुर में जैन समाज का फूटा गुस्सा; सड़कों पर उतरा जनसैलाब

जबलपुर: रीवा में बीते 20 मई को पैदल विहार कर रही पूज्य जैन साध्वियों के साथ हुई दर्दनाक और हृदयविदारक सड़क दुर्घटना के विरोध में सोमवार को संस्कारधानी जबलपुर शहर में जैन समाज का व्यापक और ऐतिहासिक आक्रोश देखने को मिला। इस भीषण हादसे से मर्माहत सकल जैन समाज ने एकजुट होकर घटना की तीव्र निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

🤫 मौन जुलूस और ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान’: कमानिया गेट से घंटाघर तक हजारों श्रद्धालुओं ने किया पैदल मार्च

दिगंबर जैन पंचायत सभा, जैन नवयुवक सभा, अखिल भारतीय महिला परिषद और सकल जैन समाज के संयुक्त तत्वावधान में ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान’ के अंतर्गत एक विशाल मौन जुलूस और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। सोमवार सुबह ऐतिहासिक कमानिया गेट पर बड़ी संख्या में समाजजन और श्रद्धालु एकत्र हुए। इसके बाद हजारों लोगों का यह मौन जुलूस अनुशासन के साथ शहर के विभिन्न प्रमुख और व्यस्त मार्गों से गुजरते हुए सीधे घंटाघर चौक पहुंचा।

🟠 श्वेत और केसरिया वेशभूषा में सजे आंदोलनकारी: महिलाओं, युवाओं और बच्चों की दिखी उल्लेखनीय भागीदारी

इस मौन प्रदर्शन की खास बात यह थी कि जुलूस में शामिल सभी पुरुष पारंपरिक सफेद कुर्ता-पायजामा में थे, जबकि महिलाएं और युवतियां केसरिया वेशभूषा धारण कर भक्ति और आक्रोश के अनूठे रंग में शामिल हुईं। प्रदर्शन में महिलाओं, युवाओं और अबोध बच्चों की उल्लेखनीय और बहुत बड़ी भागीदारी रही। समाज के प्रबुद्ध लोगों ने एक सुर में रीवा में पैदल विहार कर रही जैन साध्वियों को कार से बेरहमी से कुचलने की घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और पूरी तरह से अमानवीय बताया।

📜 संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी: तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

घंटाघर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने देश की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो संत संपूर्ण विश्व को शांति का मार्ग दिखाते हैं, आज वे ही असुरक्षित हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ त्वरित और कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि पैदल विहार करने वाले संतों और साध्वियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। प्रदर्शन के समापन पर समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने स्थानीय तहसीलदार के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री के नाम एक कड़ा और विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

🕊️ अहिंसा और संयम के दूतों पर बढ़ते हमले चिंताजनक: जैन समाज ने दी चेतावनी— ‘संत नहीं तो संस्कृति नहीं’

इस दौरान समाज के प्रबुद्धजनों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि जैन साधु-संत आजीवन अहिंसा, अपरिग्रह, संयम और विश्व शांति का पवित्र संदेश देते हैं तथा अपने कड़े नियमों के कारण जीवनभर बिना किसी वाहन के नंगे पैर (पैदल) विहार करते हैं। ऐसे परम तपस्वियों पर देश में लगातार बढ़ते जा रहे हमले और संदिग्ध सड़क हादसे पूरे समाज और मानवता के लिए बेहद गंभीर चिंता का विषय हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि देश में सनातनी संत और साध्वी ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो भारत के समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी गहरा संकट मंडरा सकता है।

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