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Ludhiana Industry Protest: PPCB के खिलाफ लुधियाना के उद्योगपतियों का महा-संग्राम; 13 बड़ी एसोसिएशनों ने खोला मोर्चा

लुधियाना: पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की कथित तानाशाही, मनमानी और निरंतर हो रहे आर्थिक उत्पीड़न के खिलाफ लुधियाना के उद्योगपतियों का गुस्सा आखिरकार ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। पीपीसीबी की दमनकारी कार्यप्रणाली से तंग आकर आज औद्योगिक नगरी लुधियाना के तमाम छोटे-बड़े कारोबारियों और दिग्गज उद्योगपतियों ने बोर्ड के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान करते हुए एक विशाल धरना प्रदर्शन किया। उद्योगपतियों के इस अप्रत्याशित और विशाल आंदोलन को देखते हुए स्थानीय जिला प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को भांपते हुए धरना स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल को मुस्तैद किया गया है और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने व रोकने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां) और बैरिकेड्स भी विशेष रूप से खड़े किए गए हैं।

😡 बिना जांच के धड़ाधड़ थमाए जा रहे हैं ‘कारण बताओ नोटिस’: कारोबारियों का आरोप— मानसिक प्रताड़ना के कारण ठप होने की कगार पर व्यापार

धरने पर बैठे आक्रोशित उद्योगपतियों का सीधा और साफ आरोप है कि पीपीसीबी (PPCB) के अधिकारी बिना किसी ठोस कानूनी आधार, बिना जमीनी स्तर की जांच और बिना किसी पुख्ता सबूत के वैध रूप से चल रही औद्योगिक इकाइयों को धड़ाधड़ ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) थमा रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि बोर्ड की इस अफसरशाही, मनमानी और उत्पीड़न के कारण न केवल उनका सुचारू कामकाज पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है, बल्कि उन्हें और उनके स्टाफ को भारी मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है।

इस महा-प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सोए हुए बोर्ड प्रशासन और पंजाब सरकार तक यह कड़ा संदेश पहुंचाना है कि एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक हब लुधियाना के उद्योगों का यह दमन अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीपीसीबी के खिलाफ शुरू हुए इस महा-संग्राम में लुधियाना की सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक संस्थाएं और व्यापारिक संगठन अपने आपसी पुराने मतभेद भुलाकर पूरी तरह से एक मंच पर आ गए हैं।

🤝 शहर की 13 सबसे बड़ी औद्योगिक एसोसिएशनों का मिला खुला समर्थन: एकजुट हुए साइकिल, होजरी और स्टील सेक्टर के दिग्गज

लुधियाना के इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है जब उद्योगों को बचाने के लिए शहर की 13 सबसे बड़ी और प्रभावशाली व्यापारिक एसोसिएशनों ने इस आंदोलन को अपना खुला और सीधा समर्थन दिया है। इस महा-गठबंधन में शामिल प्रमुख संस्थाएं इस प्रकार हैं:

  • UCPMA (यूनाइटेड साइकिल्स एंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन)

  • FICO (फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल ऑर्गनाइजेशन)

  • फास्टनर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया

  • एसोसिएशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रियल अंडरटेकिंग्स

  • एपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पंजाब)

  • इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ इंडिया

  • फास्टनर्स सप्लायर्स एसोसिएशन

  • लघु उद्योग भारती, लुधियाना

  • लुधियाना स्टील ब्रोकर्स वेलफेयर एसोसिएशन

  • लुधियाना वायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन

  • लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन

  • स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन

  • स्मॉल स्केल मिलर गंज वेलफेयर एसोसिएशन

🔑 मांगे पूरी नहीं हुईं तो पूरे पंजाब में फैलेगा आंदोलन: फैक्ट्रियों की चाबियां सरकार को सौंपने की दी अंतिम चेतावनी

प्रदर्शन के अंतिम चरण में उद्योगपतियों के शीर्ष नेताओं ने मंच से पंजाब सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़े शब्दों में अंतिम चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर बोर्ड ने अपनी उद्योगों को बंद करने की दमनकारी और तानाशाही नीतियां तुरंत प्रभाव से बंद नहीं कीं, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को केवल लुधियाना तक सीमित न रखकर पूरे पंजाब के हर औद्योगिक शहर (जैसे अमृतसर, जालंधर, मंडी गोबिंदगढ़) में फैलाया जाएगा।

उद्योगपतियों ने दोटूक लहजे में कहा कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों को अनसुना किया, तो राज्य भर के उद्योगपति अपनी फैक्ट्रियों को पूरी तरह बंद कर उनकी चाबियां सीधे मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को सौंप देंगे, जिसकी पूरी आर्थिक और राजनीतिक जिम्मेदारी पंजाब शासन की होगी।

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