ब्रेकिंग
Ganesh Visarjan Vastu Tips: बप्पा की विदाई के बाद नारियल के इन अचूक उपायों से घर में बरसेगी मां लक्ष... Air Travel Costly News: बिना साथी बच्चों और इन्फेंट ट्रेवल फीस में भारी बढ़ोतरी, जेब पर पड़ेगा सीधा ... Ujjain RSS Chief Visit: धर्म किसी को बांधता नहीं, मुक्त करता है; उज्जैन युवा धर्म संसद में पहुंचे सं... Guna Theme Road Project: गुना में ₹30 करोड़ से बनेगी 7 किमी लंबी थीम रोड; ज्योतिरादित्य सिंधिया ने क... Mahakaleshwar Ujjain News: अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उज्जैन पहुंचे नितिन नबीन; शिप्रा तट पर दीप उ... Delhi Crime News: कड़कड़डूमा कोर्ट के पुराने आदेश में संशोधन, रेप पीड़िता की याचिका पर हाई कोर्ट की ... Delhi-Gurugram Crime News: युवराज हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा, पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसक... Haribabu Murder Case Update: पत्नी की मौत के बाद जमानत पर छूटे पति की सरेआम हत्या, आरोपी साले ने वीड... J&K Majalta Encounter: मलताजा में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, M4 और AK-47 समेत भारी मात्... Bareilly GRP Action: चलती ट्रेन में कोच अटेंडेंट ने की सोने की चेन चोरी, आपस में बांटे तीन टुकड़े; प...
देश

Supreme Court Update: कानून के छात्रों की उपस्थिति पर SC का बड़ा फैसला; हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

नई दिल्ली: कानून के छात्रों की अनिवार्य उपस्थिति (Attendance) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले साल के उस निर्देश पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि केवल कम उपस्थिति के आधार पर छात्रों को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता। यह आदेश बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है। कोर्ट ने अब इस मामले में 21 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

📜 क्या था 2016 का मामला?

यह कानूनी विवाद एमिटी यूनिवर्सिटी के एक छात्र की दुखद आत्महत्या के मामले से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र को कम उपस्थिति के कारण परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई थी। वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया था ताकि कानूनी शिक्षा के मानक और उपस्थिति संबंधी नियमों पर विस्तृत विचार किया जा सके।

🏛️ हाईकोर्ट का तर्क और विवादित फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि कानूनी शिक्षा केवल कक्षा में बैठने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कोर्ट का मानना था कि मूट कोर्ट, सेमिनार, मॉक पार्लियामेंट और वाद-विवाद जैसी गतिविधियों को भी अकादमिक क्रेडिट दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट के अनुसार, उपस्थिति के कठोर नियम छात्रों की रचनात्मकता और स्वतंत्र सोच को सीमित करते हैं। इसी ‘पैरा 249’ के तहत दिए गए इन निर्देशों पर अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे अब फिर से उपस्थिति संबंधी नियमों को लेकर कानूनी बहस शुरू हो गई है।

Related Articles

Back to top button