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Gyan Bharatam Mission Haryana: हरियाणा में 27 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां डिजिटल, जानें कैसे जुड़ें इस मिशन से

हरियाणा अपनी सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को आधुनिक डिजिटल युग से जोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत अब तक प्रदेश में 27 हजार 587 दुर्लभ पांडुलिपियों को पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। सरकार अब आम नागरिकों से अपील कर रही है कि यदि उनके पास कोई हस्तलिखित ग्रंथ या ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, तो उनकी जानकारी साझा करें ताकि इसे संरक्षित किया जा सके।

🧠 सिर्फ दस्तावेज नहीं, पीढ़ियों की बौद्धिक विरासत

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि यह अभियान महज पुरानी कागजों की फाइलिंग नहीं है, बल्कि यह भारत के आयुर्वेद, दर्शन, साहित्य और सामाजिक परंपराओं को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने निर्देश दिए कि सर्वेक्षण की गति को और तेज किया जाए ताकि प्रदेश के कोने-कोने में बिखरी पांडुलिपियों को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जा सके।

🔍 गांवों से पुस्तकालयों तक खोज अभियान

पांडुलिपियों की खोज के लिए जिला स्तर पर विशेष टीमें काम कर रही हैं। अभिलेखागार विभाग को इस मिशन की नोडल एजेंसी बनाया गया है, साथ ही हर जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। शिक्षण संस्थानों और निजी संग्रहकर्ताओं के सहयोग से दुर्लभ दस्तावेजों को ढूंढा और संरक्षित किया जा रहा है ताकि इतिहास के अनमोल पन्नों को खोने से बचाया जा सके।

🌐 शोधकर्ताओं के लिए बनेगा ज्ञान का महासागर

अभिलेखागार विभाग के सचिव डॉ. साकेत कुमार ने बताया कि यह अभियान एक विशाल डिजिटल भंडार तैयार करेगा, जिससे भविष्य में शोधकर्ताओं और इतिहासकारों को दुर्लभ सामग्री तक आसान पहुंच मिलेगी। इस मिशन में कुरुक्षेत्र जिला 15 हजार 818 पांडुलिपियों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है, जो अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।

संपादकीय टिप्पणी: यदि आपके पास भी कोई पुरानी पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज है, तो उसे प्रशासन के साथ साझा कर आप भारत की ज्ञान परंपरा को बचाने में योगदान दे सकते हैं। क्या आप इस मिशन के महत्व के बारे में जानते थे? अपने विचार साझा करें।

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