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राजस्थान

Rajasthan Education News: शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही; 7 करोड़ की 10 लाख किताबें बनीं रद्दी, मचा हड़कंप

राजस्थान के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य में बच्चों की पढ़ाई के लिए छपवाई गई लगभग 10 लाख किताबें गोदामों में रद्दी बनकर पड़ी हैं। इन किताबों की छपाई पर सरकारी खजाने से करीब 7 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 5 लाख किताबें केवल सातवीं कक्षा की हैं, जिनका पाठ्यक्रम सत्र 2026-27 में बदल दिया गया था।

📦 किताबों के पीछे छिपा ‘खेल’

रिपोर्ट्स के अनुसार, जब नई किताबों की सप्लाई शुरू हुई, तो पता चला कि पुरानी किताबों के बंडल जानबूझकर नई किताबों के पीछे छिपाकर रखे गए थे ताकि उन पर किसी का ध्यान न जाए। जब यह मामला मीडिया के सामने आया, तब जाकर विभाग ने स्वीकार किया कि अतिरिक्त किताबों का स्टॉक मौजूद है। सवाल यह है कि जब पाठ्यक्रम में बदलाव प्रस्तावित था, तो इतनी बड़ी संख्या में अग्रिम छपाई क्यों करवाई गई?

🎤 शिक्षा मंत्री और विभाग का पक्ष

इस मामले पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सफाई देते हुए कहा कि NCERT की नई किताबें समय पर उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण पुरानी कोर्स की किताबें छपवाई गई थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि नया सिलेबस आने के बाद पुरानी किताबें अनुपयोगी हो जाती हैं और इस पूरे प्रकरण की जांच करवाई जा रही है।

📢 शिक्षक संगठनों ने उठाई मांग

लाखों किताबों के रद्दी होने से सरकारी संसाधनों की हुई बर्बादी पर शिक्षक संघों ने नाराजगी जताई है। संघ का कहना है कि सरकार बदलते ही पाठ्यक्रम बदलने की परंपरा पर रोक लगनी चाहिए। शिक्षाविदों की मांग है कि एक बार पाठ्यक्रम में बदलाव होने के बाद उसे कम से कम 10 वर्षों तक स्थिर रखा जाना चाहिए ताकि इस तरह की वित्तीय बर्बादी को रोका जा सके।

संपादकीय टिप्पणी: क्या सरकारी धन का उपयोग इतनी लापरवाही से करना स्वीकार्य है? इतनी बड़ी संख्या में किताबों का रद्दी होना सिस्टम की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या आपको लगता है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।

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