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धार्मिक

5th Bada Mangal 2026: आज पांचवां बड़ा मंगल; जानें बुढ़वा मंगल की पौराणिक कथा और हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व

सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह के मंगलवार का अत्यंत महत्व है, जिन्हें ‘बड़ा मंगल’ कहा जाता है। आज पांचवां बड़ा मंगल है, जो इस वर्ष ज्येष्ठ अधिकमास में पड़ रहा है। तीन साल में एक बार आने वाला यह अधिकमास पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन प्रभु श्रीराम के परम भक्त संकटमोचन हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि कलयुग में भी हनुमान जी पृथ्वी पर वास करते हैं और अपने भक्तों के सभी संकटों को दूर करते हैं।

📜 क्यों कहा जाता है ‘बुढ़वा मंगल’?

 

ज्येष्ठ मास के इन मंगलवारों को ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे की कहानी महाभारत काल से जुड़ी है। कथा के अनुसार, भीम अपनी शारीरिक शक्ति पर बहुत गर्व करते थे। एक बार अज्ञातवास के दौरान, द्रौपदी की इच्छा पूरी करने के लिए फूल लेने जाते समय मार्ग में भीम ने एक बूढ़े वानर को लेटे देखा।

🐒 भीम और हनुमान जी की रोचक भेंट

 

जब भीम ने वानर से अपनी पूंछ हटाने को कहा, तो वानर ने असमर्थता जताई। भीम ने जब उस पूंछ को उठाने का प्रयास किया, तो वे उसे तनिक भी नहीं हिला पाए। तब उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने वानर से क्षमा मांगी। उसी समय वानर ने अपना वास्तविक रूप धारण किया, जो स्वयं हनुमान जी थे। जिस दिन ज्येष्ठ माह के मंगलवार को यह मुलाकात हुई, उसी दिन से इस मास के मंगल को ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाने लगा।

🙏 पूजा का विशेष लाभ

 

हनुमान जी और भीम की यह भेंट अहंकार के नाश और भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक है। इस दिन व्रत और विशेष पूजा करने से जातक को हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे मानसिक बल, शारीरिक शक्ति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

 

संपादकीय टिप्पणी: बुढ़वा मंगल की यह कथा हमें विनम्रता का संदेश देती है, चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो। क्या आपको लगता है कि आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहाँ अहंकार बढ़ रहा है, ऐसे पौराणिक प्रसंगों का स्मरण करना आत्म-सुधार के लिए जरूरी है? अपने विचार नीचे साझा करें।

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