Delhi BnB Scheme Scrapped: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ स्कीम होगी बंद

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके में होटल अग्निकांड में 21 लोगों की दुखद मौत के बाद दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (BnB) स्कीम को आधिकारिक रूप से वापस लेने और इसके तहत संचालित सभी प्रतिष्ठानों की गहन समीक्षा करने का फैसला किया है। पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह स्कीम शीला दीक्षित के कार्यकाल में 2007 में शुरू की गई थी।
⚠️ लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई
मंत्री कपिल मिश्रा ने चेताया कि यदि इस स्कीम के तहत रजिस्टर्ड कोई भी प्रतिष्ठान 6 से अधिक कमरे संचालित करते हुए पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। जांच में सामने आया कि ‘फ्लरिश स्टे’ होटल को सिल्वर कैटेगरी के तहत केवल 6 कमरों का लाइसेंस मिला था, लेकिन वह कथित तौर पर 25 कमरे संचालित कर रहा था। उसके पास अनिवार्य फायर एनओसी (NOC) भी नहीं थी। पर्यटन विभाग ने स्पष्ट किया है कि विभाग का काम लाइसेंस देना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है, जबकि गेस्ट रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस की होती है।
📜 क्या थी बेड एंड ब्रेकफास्ट (BnB) स्कीम?
इस स्कीम को 2007 में शुरू करने के पीछे उद्देश्य पर्यटकों को ‘घर जैसा अनुभव’ प्रदान करना था, जहां वे पारंपरिक भारतीय परिवार के साथ रह सकें और घर का बना खाना खा सकें। इस योजना के तहत सरकार उन लोगों का रजिस्ट्रेशन करती थी जो अपने घर को BnB यूनिट में बदलना चाहते थे। इसे गोल्ड और सिल्वर दो कैटेगरी में बांटा गया था, जो सुविधाओं और गुणवत्ता पर आधारित थी। गोल्ड कैटेगरी के लिए फीस 5,000 रुपये और सिल्वर के लिए 3,000 रुपये थी। रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट 3 साल के लिए वैध होता था।
📑 पंजीकरण की शर्तें और प्रक्रिया
इस स्कीम के तहत कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य था। घर के मालिक का उसी घर में रहना जरूरी था और अधिकतम 6 कमरे ही किराए पर दिए जा सकते थे। रजिस्ट्रेशन के लिए कुल 36 शर्तें रखी गई थीं, जिनमें 24 घंटे गर्म-ठंडा पानी, इंटरनेट, टॉयलेट की सुविधा, और कमरे में टेबल-कुर्सी जैसे मानक शामिल थे। 2021 के संशोधन के बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को 90 दिन से घटाकर 30 दिन कर दिया गया था, लेकिन अब इस पूरे सिस्टम की सुरक्षा और वैधता पर सवाल उठने के बाद इसे बंद करने का निर्णय लिया गया है।
संपादकीय टिप्पणी: क्या आपको लगता है कि इस प्रकार की स्कीम को बंद करना ही एकमात्र समाधान है, या फिर होटल सुरक्षा नियमों के सख्त ‘इंस्पेक्शन ऑडिट’ से इन हादसों को रोका जा सकता है? अपने विचार नीचे साझा करें।






