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Latehar News: लातेहार में सरकारी दावों की पोल; टूटे-फूटे शौचालय में रहने को मजबूर है गरीब बुजुर्ग

लातेहार: सरकार गरीबों के लिए कई प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं चला रही है और योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान के लोगों तक पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन लातेहार से सामने आई एक तस्वीर ने इन दावों की पोल खोल दी है। यहां एक बुजुर्ग व्यक्ति बदहाली में टूटे-फूटे शौचालय में रहने को मजबूर है। आश्चर्य की बात यह है कि उन्हें आज तक सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। लातेहार सदर प्रखंड की इचाक पंचायत अंतर्गत लवरपुर गांव निवासी सोमर भुइयां आज भी अत्यधिक गरीबी में जीने को विवश हैं। राशन, पेंशन और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं से वे पूरी तरह वंचित हैं। हालांकि, सरकार की नजर में वे भारत के नागरिक हैं और उनका वोटर आईडी कार्ड भी बना हुआ है, लेकिन वोट देने के अलावा उन्हें अन्य किसी भी प्रकार की योजना से नहीं जोड़ा गया है।

🤲 बीमारी और लाचारी: हाथ और अंगुलियां बेकार होने के कारण नहीं बन पा रहा आधार, भोजन के लिए भी संघर्ष

पीड़ित सोमर भुइयां बताते हैं कि पहले वह मिट्टी के घर में रहते थे, लेकिन पिछले वर्ष की बारिश में घर ध्वस्त हो गया। मजबूरी में उन्होंने गांव के ही एक ग्रामीण के बेकार पड़े पुराने और टूटे-फूटे शौचालय को अपना आशियाना बना लिया। सोमर बताते हैं कि एक बीमारी के कारण उनकी अंगुलियां और हाथ काफी कमजोर हो गए हैं। स्थिति यह है कि यदि कहीं से कुछ मिल गया तो भोजन हो पाता है, अन्यथा उन्हें भूखा ही रहना पड़ता है। घर के बाहर मिट्टी का चूल्हा तो है, लेकिन उसमें डालने के लिए अनाज का एक दाना तक नहीं है। गरीबी और लाचारी के कारण उनकी शादी भी नहीं हो सकी, जिस कारण वे पूरी तरह एकांकी जीवन जी रहे हैं।

👥 क्या कहते हैं पंचायत प्रतिनिधि: मुखिया बोले—आधार के बिना अटका है राशन और पेंशन का लाभ

इस संबंध में इचाक पंचायत के मुखिया शशि कुजूर ने बताया कि सोमर भुइयां का आज तक आधार कार्ड नहीं बन पाया है। उन्होंने कहा कि कई बार सोमर का आधार बनवाने का प्रयास किया गया, लेकिन हाथ की अंगुलियां खराब रहने के कारण बायोमेट्रिक सत्यापन में समस्या आ रही है। आधार के अभाव में न तो सोमर का बैंक खाता खुल पा रहा है और न ही राशन अथवा पेंशन की सुविधा मिल पा रही है। मुखिया ने आश्वासन दिया है कि पूरा प्रयास किया जा रहा है कि सोमर को कम से कम राशन और पेंशन योजना का लाभ मिल सके। आधार बनने के बाद ही उन्हें आवास जैसी अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा सकेगा।

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