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बिहार

Bihar News: छपरा-हाजीपुर फोरलेन का अधूरा पुल; 15 वर्षों से निर्माणाधीन, अब 40 करोड़ के नए ठेके से जगी उम्मीद

बिहार: छपरा-हाजीपुर फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग पर गंडक नदी के ऊपर बन रहा पुल बिहार की सुस्त परियोजना प्रबंधन का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। महज 1.4 किलोमीटर लंबा यह पुल पिछले 15 वर्षों से पूरा होने का इंतजार कर रहा है। साल 2010 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट की कछुआ चाल का आलम यह है कि डेढ़ दशक बाद भी 500 मीटर हिस्सा पूरा नहीं हो सका है।

🚧 एनएचएआई का बड़ा फैसला: बदली गई निर्माण एजेंसी

लगातार मिल रही शिकायतों और काम में लापरवाही को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पुरानी निर्माण एजेंसी से प्रोजेक्ट वापस ले लिया है। अब काम पूरा करने की जिम्मेदारी एक नई एजेंसी को सौंपी गई है, जिसके लिए करीब 40 करोड़ रुपये का नया ठेका दिया गया है। एनएचएआई ने जनवरी 2027 तक पुल को जनता के लिए खोलने का लक्ष्य रखा है।

🛡️ गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि 15 वर्षों तक खुले आसमान के नीचे पड़े निर्माण सामग्री (लोहा आदि) में जंग लगने की आशंका है। इतने लंबे समय तक काम रुके रहने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती पुल की संरचनात्मक मजबूती (Structural Strength) और सुरक्षा मानकों की जांच करना है, ताकि जनता के लिए यह सुरक्षित रहे।

🚗 यातायात का भारी दबाव और जाम की समस्या

65 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन प्रोजेक्ट की लागत 575 करोड़ रुपये है। पुल के अधूरा होने के कारण पुराने पुल पर वाहनों का भारी दबाव है, जिससे रोजाना घंटों जाम की स्थिति रहती है। पुल के तैयार होने से पटना, हाजीपुर और सोनपुर के बीच आवागमन सुगम होगा और भारी वाहनों के दबाव से छपरा शहर को राहत मिलेगी।

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