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झारखण्ड

Shibu Soren Padma Bhushan: दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रदान करेंगी सम्मान

रांची: झारखंड आंदोलन के प्रमुख शिल्पकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा जाएगा। मंगलवार, 23 जून को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यह सम्मान प्रदान करेंगी। दिवंगत शिबू सोरेन की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन यह पुरस्कार ग्रहण करेंगी। केंद्र सरकार ने इस वर्ष जनवरी में पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी, जिसमें गुरुजी के लोक कल्याण क्षेत्र में असाधारण योगदान को मान्यता दी गई है।

🏹 महाजनों के खिलाफ संघर्ष से ‘दिशोम गुरु’ तक का सफर

11 जनवरी 1944 को रामगढ़ के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों की एक लंबी दास्तां है। 13 साल की उम्र में पिता सोबरन सोरेन की हत्या ने उन्हें विचलित कर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने महाजनों के खिलाफ एक ऐतिहासिक आंदोलन छेड़ा और आदिवासियों को उनकी जमीनों का हक दिलाया। उनकी निडरता के कारण ही लोग उन्हें प्यार से ‘गुरुजी’ और संथाल परगना के लोग ‘दिशोम गुरु’ कहकर पुकारने लगे।

🏔️ जल, जंगल और जमीन की लड़ाई के नायक

शिबू सोरेन को जल, जंगल और जमीन की लड़ाई और आदिवासी अस्मिता के सबसे बड़े योद्धा के तौर पर याद किया जाता है। 1970 के दशक में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर उन्होंने अलग राज्य की मांग को सड़क से संसद तक पहुँचाया। साल 2000 में झारखंड राज्य के गठन में उनकी भूमिका निर्णायक रही। उन्होंने आदिवासियों, किसानों और वंचित समुदायों की आवाज को हमेशा राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से रखा।

⚖️ तीन बार सीएम और आठ बार सांसद का गौरवशाली सफर

शिबू सोरेन का राजनीतिक करियर चार दशकों से अधिक का रहा। वे झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे (2005, 2008 और 2009)। साथ ही, वे दुमका से आठ बार लोकसभा सदस्य रहे और राज्यसभा में भी अपनी सेवाएं दीं। केंद्र सरकार में तीन बार कोयला मंत्री की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने गरीबों की आवाज बुलंद की। 81 वर्ष की आयु में 2025 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार और संघर्ष झारखंड की राजनीति में सदैव जीवंत रहेंगे।

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