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Ram Mandir Donation Controversy: चांदी का काकभुशुण्डि मिलने के बाद भी खड़े हुए सवाल; दानदाताओं ने रसीद न मिलने का लगाया आरोप

अयोध्या: राम मंदिर में दान की गई सामग्रियों के गायब होने की चर्चा के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। चांदी का काकभुशुण्डि, जिसे गायब बताया जा रहा था, वह मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर स्थित ‘भरतकुटीर’ (चंपत राय का निवास स्थान) में मिल गया है। हालांकि, काकभुशुण्डि के मिलने के बाद भी दानदाताओं की नाराजगी कम नहीं हुई है, क्योंकि उन्होंने रसीद न मिलने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

📜 दानदाताओं ने उठाए रसीद न मिलने के सवाल

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब दानदाता अनीता ने रसीद न मिलने की शिकायत की। इसके बाद एक और दानदाता श्रीनिवास शास्त्री ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त की। शास्त्री के अनुसार, उन्होंने चांदी की चरण पादुकाएं, चांदी की ईंटें, त्रिशूल और करीब 6 लाख रुपये की कीमत वाली ‘रोटी बनाने की मशीन’ दान की थी। उनका आरोप है कि:

  • चांदी की 4 ईंटों की रसीद 6 महीने बाद दी गई।

  • 6 लाख रुपये की रोटी मशीन दान करने के बाद भी उसकी कोई रसीद उन्हें आज तक नहीं मिली है।

🏗️ शिलान्यास और दान की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

श्रीनिवास शास्त्री ने बताया कि उन्होंने रामेश्वरम से अयोध्या तक पदयात्रा कर चरण पादुकाएं पहुंचाई थीं। उनका कहना है कि उन्हें चांदी की ईंटों या धन के खोने का दुख नहीं है, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था के साथ हो रही इस लापरवाही से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उनके अनुसार, चंपत राय के निर्देश पर उन्होंने अनिल मिश्र को चांदी की ईंट सौंपी थी, जिसकी प्रक्रिया और दस्तावेजीकरण में भारी पारदर्शिता की कमी रही।

⚖️ पारदर्शिता की मांग

यह पूरा मामला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़ा कर रहा है। जहां एक ओर मंदिर प्रबंधन दान की सुरक्षा को लेकर नई गाइडलाइंस का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दानदाताओं के ये आरोप मंदिर की साख के लिए चुनौती बन गए हैं। अब देखना यह है कि ट्रस्ट इन रसीद विवादों और दान सामग्रियों के प्रबंधन पर क्या सफाई देता है।

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