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झारखण्ड

Ranchi Rath Mela 2026: रांची की सांस्कृतिक पहचान ‘धुर्वा मेला’ की तैयारियां तेज, प्रशासन ने सुरक्षा के किए कड़े प्रबंध

रांची: राजधानी रांची के धुर्वा स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर में वार्षिक रथ यात्रा महोत्सव को लेकर तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए पारंपरिक रथ का निर्माण ओडिशा से आए अनुभवी कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। इस वर्ष रथ की नक्काशी और सजावट को विशेष रूप से आकर्षक बनाया जा रहा है।

🗓️ महोत्सव की महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • 29 जून (देव स्नान): भगवान का विशेष स्नान, जिसके बाद वे 15 दिनों के ‘अनासर काल’ (एकांतवास) में प्रवेश करेंगे। इस दौरान मंदिर का गर्भगृह श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा।

  • 15 जुलाई (नेत्रोत्सव): धार्मिक अनुष्ठान के साथ भगवान के नेत्रों का पुनः अंकन होगा।

  • 16 जुलाई (रथ यात्रा): भव्य रथ यात्रा का आयोजन, जिसमें भगवान अपने रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे। इसी के साथ 10 दिवसीय ऐतिहासिक रथ मेला शुरू होगा।

💰 मेला टेंडर और प्रशासनिक व्यवस्था

मेले के सफल संचालन के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई हैं। मेला टेंडर के लिए बेस प्राइस 1 करोड़ 5 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि सुरक्षा, यातायात, पेयजल और स्वच्छता को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। टेंडर प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो।

🏹 रांची की सांस्कृतिक पहचान: धुर्वा मेला

धुर्वा रथ मेला झारखंड के सबसे बड़े पारंपरिक मेलों में से एक है। यहाँ झारखंड के अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी व्यापारी पहुंचते हैं। हस्तशिल्प, पारंपरिक वाद्ययंत्र (मांदर), तीर-धनुष, घरेलू सामान और मनोरंजन के साधनों से सुसज्जित यह मेला लाखों पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।

🏛️ 1691 से है जगन्नाथ मंदिर का गौरवशाली इतिहास

धुर्वा स्थित यह मंदिर वर्ष 1691 में नागवंशी शासकों द्वारा बनवाया गया था। लगभग 250 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। 1991 में हुए इसके पुनर्निर्माण के बाद से यह पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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