ब्रेकिंग
कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क... सागर कांड के बाद छतरपुर प्रशासन का बड़ा एक्शन: अवैध शराब कारोबारियों पर संयुक्त प्रहार
हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: दुष्कर्म और POCSO के झूठे मामले में फंसे बेगुनाह युवक की FIR रद्द

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और पेचीदा कानूनी मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म और POCSO एक्ट के झूठे आरोपों में फंसे एक बेगुनाह युवक के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। जस्टिस राकेश कैंथला की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि जब वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी को पूरी तरह बेगुनाह साबित कर दिया है, तो उसे आपराधिक मुकदमे की मानसिक और कानूनी प्रताड़ना झेलने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।

📝 क्या था पूरा मामला और कैसे दर्ज हुआ था केस?

इस मामले की शुरुआत साल 2023 में बिलासपुर जिले के महिला पुलिस स्टेशन से हुई थी। नाबालिग पीड़िता के बयानों के आधार पर आयुष नाम के युवक पर आईपीसी की धारा 376, 506 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप लगाया गया था कि आयुष ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया, जिससे पीड़िता गर्भवती हुई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया।

🧬 फॉरेंसिक लैब की डीएनए (DNA) जांच में निकला सच

अदालत में मामले का रुख तब पूरी तरह बदल गया जब वैज्ञानिक साक्ष्य सामने आए। पुलिस जांच के दौरान जब पीड़िता, नवजात शिशु और आरोपी आयुष के सैंपल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजे गए, तो आयुष का DNA बच्चे से बिल्कुल मैच नहीं हुआ। इसके बाद जब अन्य संदिग्धों के DNA सैंपल की जांच की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पीड़िता का सगा भाई ही उस नवजात शिशु का जैविक (बायोलॉजिकल) पिता निकला।

🔍 पीड़िता का पूरक बयान और अदालत का आदेश

एफएसएल (FSL) रिपोर्ट सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस के समक्ष अपना पूरक बयान दर्ज कराया और स्वीकार किया कि उसके सगे भाई ने ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। इन पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाणों और पीड़िता के बदले बयानों के आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी आयुष पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार थे, जिसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया।

Related Articles

Back to top button