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पंजाब

पंजाब में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार! बठिंडा समेत कई शहरों में कूड़े के ढेर, बीमारियों का खतरा बढ़ा

बठिंडा (पंजाब): बरनाला में पंजाब पुलिस द्वारा सफाई कर्मचारियों के साथ किए गए कथित अत्याचार के विरोध में शुरू हुई प्रदेशव्यापी हड़ताल अब पंजाब के तमाम बड़े शहरों और कस्बों के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी है।

लगातार जारी हड़ताल के कारण नगर निगमों और नगर परिषदों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप होकर रह गई है। गलियों, मोहल्लों, व्यावसायिक बाजारों और मुख्य सड़कों पर कूड़े-कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, नालियां पूरी तरह जाम हैं, सीवरेज का दूषित पानी सड़कों पर उफन रहा है और चारों ओर फैली तीव्र दुर्गंध ने आम लोगों का सांस लेना तक दूभर कर दिया है। सबसे अधिक परेशानी आम नागरिकों को उठानी पड़ रही है, क्योंकि घरों से निकलने वाला सूखा व गीला कचरा उठाने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। लोगों को समझ नहीं आ रहा कि घरेलू कचरा कहां फेंकें। कई स्थानों पर लोग मजबूरी में खाली प्लॉटों, सड़क किनारे और नालों के पास ही कूड़ा फेंक रहे हैं, जिससे गंदगी का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हड़ताल के चलते प्रशासन द्वारा दिहाड़ी मजदूरों या अन्य कर्मचारियों के माध्यम से सफाई कराने के प्रयास भी सफल नहीं हो पा रहे हैं। आरोप हैं कि हड़ताली सफाई कर्मचारी ऐसे प्रयासों का विरोध कर रहे हैं और किसी अन्य को सफाई कार्य नहीं करने दे रहे, जिसके कारण शहरों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।

⚠️ संक्रामक बीमारियों का बढ़ा बड़ा खतरा, मांगें पूरी होने के बावजूद हड़ताल वापस लेने को तैयार नहीं यूनियन

शहरों में लगातार बढ़ती गंदगी और असहनीय दुर्गंध के बीच लोग जीवन बिताने को मजबूर हैं।

गंदगी बढ़ने से महामारी और बीमारियां फैलने का खतरा भी तेजी से बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि लंबे समय तक सड़ा हुआ कूड़ा पड़े रहने और सीवरेज का गंदा पानी खुले में बहने से डेंगू, मलेरिया, डायरिया, टाइफाइड तथा अन्य खतरनाक संक्रामक रोग फैलने की आशंका काफी बढ़ जाती है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी अधिक भयावह रूप ले सकती है। इस बीच पंजाब सरकार ने सफाई कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि सहित कुछ प्रमुख मांगों को स्वीकार करने का दावा किया है, लेकिन विभिन्न गुटों में बंटी सफाई कर्मचारी यूनियनें अभी हड़ताल समाप्त करने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं। यूनियनें अपनी शेष बची मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं, जबकि दूसरी ओर आम नागरिक रोजाना गंदगी और दुर्गंध के बीच नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

🏥 पंजाब के कई शहरों में जनस्वास्थ्य का गंभीर संकट, सरकार और प्रशासन के खिलाफ जनता में रोष

सबसे चिंताजनक बात यह है कि हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं, लेकिन न तो जिला प्रशासन के पास कोई प्रभावी वैकल्पिक योजना नजर आ रही है और न ही सरकार व यूनियनों के बीच कोई ठोस समाधान निकल पा रहा है।

इससे सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर आम लोगों में भारी नाराजगी व आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब आवश्यकता इस बात की है कि सरकार और सफाई कर्मचारी यूनियनें जल्द से जल्द वार्ता के माध्यम से इस समस्या का कोई स्थाई समाधान निकालें। यदि यह हड़ताल और लंबी चली तो पंजाब के कई शहरों में जनस्वास्थ्य (Public Health) का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है, जिसकी सबसे भारी कीमत आम नागरिकों को अपनी सेहत से चुकानी पड़ेगी।

🗣️ प्रशासन, मेयर और नेताओं ने की हड़ताल खत्म करने की अपील, फिर भी अड़े सफाई कर्मचारी

प्रदेश में लगातार बिगड़ रहे हालात को देखते हुए जिला प्रशासन, नगर निगम के मेयर तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने सफाई कर्मचारियों से सहानभूतिपूर्वक अपील की है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी जायज मांगों को लेकर लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखें, लेकिन आम जनता के स्वास्थ्य और सुविधा को ध्यान में रखते हुए कम से कम अत्यावश्यक सफाई व्यवस्था तुरंत बहाल करें। उनका कहना है कि लगातार जमा हो रहा कूड़ा और सीवरेज की समस्या जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है, जिसका खामियाजा बेकसूर नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर पंजाब सरकार के स्तर पर लगातार उच्चस्तरीय बैठकें हो रही हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर कैबिनेट स्तर पर भी गहन विचार-विमर्श जारी है और जो भी उचित निर्णय लिया जाएगा, उसे तुरंत लागू किया जाएगा। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकल आएगा, लेकिन तब तक लोगों को बीमारियों के खतरे से बचाने के लिए कर्मचारियों से सहयोग की अपेक्षा है। इसके बावजूद हड़ताल जारी रहने से शहरों और कस्बों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है, जिससे लोगों में रोष के साथ-साथ बीमारियों के फैलने की चिंता बढ़ती जा रही है।

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