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मध्यप्रदेश

MP में आदिवासियों पर कांग्रेस का बड़ा दांव! उमंग सिंघार की अगुवाई में टास्क फोर्स गठित, आंदोलन का बना ब्लूप्रिंट

भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में होने वाले आगामी स्थानीय निकायों, विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारी में कांग्रेस पूरी मुस्तैदी के साथ जुट गई है।

राज्य की चुनावी राजनीति में आदिवासी समुदाय की भूमिका बेहद निर्णायक मानी जाती है। यही मुख्य कारण है कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश भर में आदिवासियों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को बड़े स्तर पर उठाने के लिए एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार कर रही है। स्थानीय जमीनी स्तर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक आदिवासी समाज की समस्याओं को मुखरता से उठाने के लिए कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व रणनीति बनाने में जुटा हुआ है।

📜 उमंग सिंघार के नेतृत्व में गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक, जिला से प्रदेश स्तर तक प्रदर्शन की बनी रणनीति

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के दिशा-निर्देश पर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने एक विशेष ‘टास्क फोर्स’ का गठन किया है, जिसकी प्रथम आधिकारिक बैठक गुरुवार को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय (PCC) में संपन्न हुई।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में गठित इस शक्तिशाली टास्क फोर्स में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया मुख्य रूप से शामिल हैं। बैठक में प्रदेश भर में आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय व दुर्व्यवहार के खिलाफ जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक उग्र धरना-प्रदर्शन करने की ठोस रूपरेखा तैयार की गई है।

🏛️ ‘स्टेट ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी’ का गठन, वरिष्ठ नेताओं संग तैयार हो रहा पुख्ता रणनीति का मसौदा

आदिवासी रणनीतियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कांग्रेस ने एक ‘स्टेट ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी’ (State Tribal Advisory Committee) का भी गठन किया है।

इस कमेटी में पार्टी के वरिष्ठ व अनुभवी आदिवासी नेताओं के साथ मिलकर समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों पर गंभीर विचार-विमर्श किया जा रहा है। आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने बताया कि प्रदेश में आदिवासियों को जहां भी समस्याएं आएंगी, कांग्रेस वहां जन-आंदोलन खड़ा करेगी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्पष्ट किया कि आदिवासियों पर कांग्रेस का हमेशा से मुख्य फोकस रहा है और उनके मान-सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेगी।

🗳️ मध्य प्रदेश की राजनीति में क्यों अहम है आदिवासी वोट बैंक? जानिए 21% आबादी का पूरा सियासी समीकरण

मध्य प्रदेश की सियासत में आदिवासी (ST) मतदाता हर छोटे-बड़े चुनाव के परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित करने का मद्दा रखते हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में आदिवासियों की कुल आबादी लगभग 21 प्रतिशत है और राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए पूरी तरह आरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त, प्रदेश की 30 से अधिक सामान्य विधानसभा सीटों पर आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में इनकी आबादी 15 से 18 फीसदी तक है। यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दल आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिए लगातार सक्रिय रहते हैं।

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