ब्रेकिंग
HCL मलाजखंड और आईआईटी कानपुर की SATHEE पहल ने मलाजखंड में आयोजित किया करियर काउंसलिंग एवं जागरूकता स... गाजियाबाद में निषाद पार्टी का कार्यक्रम, काफी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क...
मध्यप्रदेश

इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी

इंदौर (मध्य प्रदेश): हिंदू परंपराओं में विवाह को सात जन्मों का पवित्र और अटूट बंधन माना जाता है, किंतु मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से एक ऐसा विरला मामला सामने आया है, जहां एक नवविवाहित जोड़े का वैवाहिक जीवन महज 7 दिन यानी मात्र 168 घंटे ही टिक सका।

इंदौर के पारिवारिक न्यायालय (Family Court) ने मामले की संवेदनशीलता और असाधारण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आपसी सहमति (Mutual Consent) से दायर तलाक की याचिका को तत्काल मंजूरी दे दी और दोनों को विवाह के कानूनी बंधन से पूरी तरह मुक्त कर दिया।

💔 “परिवार के दबाव में की थी शादी, किसी और से करती हूं प्यार”: सुहागरात के बाद दुल्हन का बड़ा खुलासा

प्राप्त विवरण के अनुसार, युवती ने अपने परिजनों के भारी दबाव में आकर विवाह के लिए सहमति तो दे दी थी, परंतु वह वास्तव में यह शादी करना ही नहीं चाहती थी।

विवाह की रस्में संपन्न होने के तुरंत बाद ही युवती ने अपने पति के सामने स्थिति स्पष्ट करते हुए साफ कह दिया कि वह उसके साथ जीवन नहीं बिता सकती, क्योंकि वह पूर्व से ही किसी अन्य युवक से प्रेम करती है। पति ने भी स्थिति की गंभीरता और पत्नी की मंशा को समझा। दोनों ने एक-दूसरे का जीवन और भविष्य खराब करने के बजाय परिपक्वता दिखाते हुए आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया।

⚖️ 1 वर्ष अलग रहने की शर्त से छूट: एडवोकेट वर्षा गुप्ता ने दिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

सामान्य परिस्थितियों में हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर करने के लिए पति-पत्नी का कम से कम 1 वर्ष तक पृथक (अलग) रहना अनिवार्य होता है।

हालांकि, इस मामले में जोड़े की ओर से पैरवी कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता वर्षा गुप्ता ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14(2) के अंतर्गत विशेष प्रावधान का सहारा लिया। एडवोकेट वर्षा गुप्ता ने अदालत के समक्ष सशक्त तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं कि जो विवाह वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं आया हो और जहां दोनों पक्ष साथ रहने के इच्छुक न हों, वहां उन्हें साथ रहने के लिए बाध्य करना उनके जीवन और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा होगा।

🏛️ इंदौर फैमिली कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, 168 घंटे में विवाह घोषित किया शून्य

इंदौर पारिवारिक न्यायालय ने प्रस्तुत तथ्यों, परिस्थितियों और दोनों पक्षों की स्पष्ट तथा स्वतंत्र सहमति को दृष्टिगत रखते हुए 1 वर्ष की अनिवार्य पृथक निवास अवधि की बाध्यता से छूट प्रदान की।

अदालत ने महज सात दिनों (168 घंटों) के रिकॉर्ड समय में इस विवाह को विच्छेदित/शून्य घोषित करते हुए तलाक की अर्जी को त्वरित स्वीकृति प्रदान कर दी।

Related Articles

Back to top button