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कोरोना पर एचसीक्यू के ट्रायल को जारी रखेगा भारत, डब्‍लूएचओ ने एचसीक्यू पर ट्रायल किया था स्थगित

नई दिल्ली। कोरोना के इलाज के लिए हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) के ट्रायल को स्थगित करने का विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का फैसला भारत को पसंद नहीं आया। वैसे तो भारत ने डब्ल्यूएचओ के फैसले पर औपचारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इतना जरूर साफ कर दिया कि एचसीक्यू पूरी तरह सुरक्षित है और वह इसका ट्रायल जारी रखेगा। ध्यान देने की बात है कि डब्ल्यूएचओ ने एचसीक्यू को दुष्प्रभाव की रिपोर्ट को देखते हुए ही इसके ट्रायल को स्थगित करने का फैसला किया था।

क्लोरोक्वीन बहुत ही पुरानी दवा है, जिसे हम पीढ़ि‍यों से हम लेते आए हैं

डब्ल्यूएचओ का नाम लिये बिना आइसीएमआर के महानिदेशक डाक्टर बलराम भार्गव ने एचसीक्यू के जानलेवा होने की आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया। डाक्टर भार्गव ने कहा कि क्लोरोक्वीन बहुत ही पुरानी दवा है, जिसे हम पीढियों से हम लेते आए हैं। यहां कि पुराने समय में डाक विभाग के अंतरदेर्शीय पत्र के ऊपर मलेरिया से बचने के लिए इसे खाने की सलाह दी जाती थी और साथ ही उसके खाने की विधि भी लिखी होती थी। उन्होंने कहा कि मलेरिया के लिए इसका व्यापक रूप से इस्तेमाल आज भी हो रहा है और किसी बड़े साइड-इफेक्ट की शिकायत कभी नहीं आई। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य पर इसका इतना अधिक दुष्प्रभाव होता, तो आठ दशक से इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा होता। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन तो क्लोरोक्वीन से भी ज्यादा सुरक्षित है।

इसके लिए दुनिया के भर के लेबोरेटरी में प्रयोग किये गए

कोरोना के संक्रमण को रोकने में एचसीक्यू की उपयोगिता के बारे में बताते हुए डाक्टर बलराम भार्गव ने कहा कि मलेरिया को रोकने में इसकी व्यापक सफलता को देखते हुए इसके एंटी वायरल होने की बायोलॉजकिल पाजिवलिटी की उम्मीद जताई गई और इसके लिए दुनिया के भर के लेबोरेटरी में प्रयोग किये गए। दुनिया के कई प्रसिद्ध विज्ञान जनरल में इन स्टडी से जुड़े पेपर छपे हुए हैं और कुछ भी छुपा नहीं है। हाल ही में पुणे स्थिति नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में एचसीक्यू का कोरोना के वायरस पर जांच की गई, जिसमें इसे कोरोना वायरस की संख्या को बढ़ने से रोकने में काफी हद तक कारगर पाया गया।

हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को छह हफ्ते तक एचसीक्यू की डोज दी गई

एचसीक्यू के साइड-इफेक्ट के जानलेवा होने और कोरोना के लिए इसके इस्तेमाल को लेकर चेतावनी देने वाले वैज्ञानिकों को करारा जवाब देते हुए डाक्टर बलराम भार्गव ने कहा कि कोरोना के इलाज में लगे हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को छह हफ्ते तक एचसीक्यू की डोज दी गई। इसके साथ ही एम्स, आइसीएमआर और दिल्ली के तीन अन्य अस्पतालों में इसके प्रभाव को देखने के लिए कंट्रोल स्टडी की गई। दोनों ही स्टडी में एचसीक्यू को सुरक्षित पाया गया और कोई बड़ा साइड-इफेक्ट देखने को नहीं मिला। कुछ लोगों ने जी मिचलाने और उल्टी की शिकायत जरूर की। लेकिन यह उन लोगों में पाया गया, जिन्होंने खाली पेट दवा खाई थी।

यदि भोजन के साथ इसे लिया जाए, तो यह शिकायत भी नहीं आती है। दिल के मरीजों पर इसके दुष्प्रभाव की आशंका को दूर करने के लिए दवा लेने के दौरान उनका ईसीजी कराया जा सकता है और इसकी सलाह दी भी गई है। सबसे बड़ी बात है एम्स, आइसीएमआर और तीन अस्पतालों के कंट्रोल स्टडी और हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को छह हफ्ते तक दी गई दवा से मिले डाटा के विश्लेषण के साफ हुआ कि एचसीक्यून किसी व्यक्ति को कोरोना वायरस से संक्रमित होने से रोकने में मददगार साबित हो सकता है और इसके लिए क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत है।

अगले हफ्ते सभी स्‍टडी डाटा को किया जाएगा सार्वजनिक 

डाक्टर बलराम भार्गव ने कहा कि भारत में एचसीक्यू को लेकर किये गए सभी स्टडी के डाटा को अगले हफ्ते तक सार्वजनिक कर दिया जाएगा, जो कोरोना के खिलाफ उसके कारगर होने के सबूत हैं। जाहिर है भारत के पास एचसीक्यू को लेकर चल रहे ट्रायल को रोकने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत में हुई स्टडी के आंकड़ों को देखने के बाद डब्ल्यूएचओ अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा और एचसीक्यू का ट्रायल को आगे जारी रखने की अनुमति दे देगा।

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