हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: ‘दयालु योजना’ में दावे की समय-सीमा बढ़कर हुई 180 दिन, जानें किसे मिलेगा लाभ

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने ‘दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना’ (दयालु योजना) में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है। राज्य सरकार द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, अब किसी दुर्घटना में मृत्यु अथवा 70 प्रतिशत से अधिक स्थायी दिव्यांगता होने की स्थिति में आर्थिक सहायता प्राप्त करने हेतु दावे (Claim) की अवधि को 90 दिन (3 माह) से बढ़ाकर 180 दिन (6 माह) कर दिया गया है। इस निर्णय से पीड़ित परिवारों को कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
📜 पुराने मामलों को भी मिली बड़ी राहत, 1 वर्ष तक के लंबित दावों के निस्तारण हेतु बनी पारदर्शी व्यवस्था
राज्य सरकार ने पुराने लंबित मामलों को भी राहत प्रदान करते हुए छह माह तक दावा प्रस्तुत करने की विशेष अनुमति प्रदान की है।
इसके अतिरिक्त, विलंब से प्राप्त दावों के त्वरित निस्तारण हेतु पहली बार एक स्पष्ट पदानुक्रमिक व्यवस्था लागू की गई है। इसके अंतर्गत 6 से 7 माह की देरी वाले प्रकरणों का निर्णय ‘हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास’ (HPSN) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) करेंगे। 7 से 9 माह के विलंब पर वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा 9 से 12 माह तक की देरी वाले मामलों पर स्वयं राज्य के वित्त मंत्री अंतिम निर्णय लेंगे।
🏛️ जिला स्तर पर उपायुक्त (DC) संभालेंगे शिकायत निवारण, जिला सांख्यिकी अधिकारी बने नोडल अफसर
योजना के सुचारू और पारदर्शी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तर पर एक सुदृढ़ शिकायत निवारण तंत्र गठित किया गया है।
प्रत्येक जिले में जिला उपायुक्त (DC) शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए जवाबदेह होंगे, जबकि जिला सांख्यिकी अधिकारी (DSO) को जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो आम नागरिकों को आवेदन एवं सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करेंगे।
🛡️ श्रम कल्याण बोर्ड से निरस्त दावों को भी मिलेगी राहत, मूल पात्रता और सहायता राशि यथावत
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पात्र लाभार्थी का क्लेम ‘हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड’ या ‘भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड’ द्वारा किसी तकनीकी कारण से खारिज हो जाता है, लेकिन वह ‘दयालु योजना’ की शर्तें पूरी करता है, तो उसे इस योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
यद्यपि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि योजना की मूल पात्रता शर्तों और पूर्व निर्धारित सहायता राशि के स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।






