आईवीएफ दवाओं से प्रभावित होता है मां का दूध? जानिए IVF डिलीवरी के बाद स्तनपान से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य

नई दिल्ली: बांझपन (Infertility) के इलाज हेतु आईवीएफ (IVF) का चलन वर्तमान में काफी बढ़ गया है। आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को कुछ हार्मोनल दवाएं दी जाती हैं, जिसके कारण कई लोगों में यह भ्रांति बन जाती है कि ये दवाएं प्रसव के उपरांत दूध बनने (Lactation) की प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस धारणा को पूरी तरह से नकारते हुए स्पष्ट किया है कि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, आईवीएफ में दी जाने वाली हार्मोन दवाएं केवल उपचार के शुरुआती चरण (Conception Phase) तक ही कार्य करती हैं। गर्भावस्था सुनिश्चित होने के पश्चात् इन्हें धीरे-धीरे बंद कर दिया जाता है। बच्चे के जन्म तक इन दवाओं का शरीर पर कोई प्रभाव अवशेष नहीं रहता और न ही ये दूध बनने की शारीरिक क्रिया में बाधा उत्पन्न करती हैं।
🧬 कैसे काम करते हैं स्तनपान के प्राकृतिक हार्मोन? आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. सुतापा सेन से समझें
आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. सुतापा सेन के अनुसार, प्रसव के पश्चात् स्तनपान पूरी तरह से महिला शरीर के प्राकृतिक हार्मोनल तंत्र पर निर्भर करता है।
प्लेसेंटा (Garba Naal) के बाहर आने के बाद गर्भावस्था वाले हार्मोन कम हो जाते हैं और मस्तिष्क द्वारा ‘प्रोलैक्टिन’ (Prolactin) हार्मोन का स्राव होता है, जो दूध के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है। तत्पश्चात, जब शिशु स्तनपान करता है, तो ‘ऑक्सीटोसिन’ (Oxytocin) हार्मोन स्रावित होता है, जिससे दूध आसानी से बाहर आता है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने वाली महिलाओं और आईवीएफ के माध्यम से मां बनने वाली महिलाओं—दोनों में बिल्कुल एक समान होती है। विभिन्न शोध यह सिद्ध करते हैं कि स्तनपान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि जन्म के बाद मां और बच्चे की देखभाल (Postnatal Care) कैसी होती है, न कि गर्भधारण की विधि पर। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान (Early Initiation), मां-बच्चे का ‘स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट’ और बार-बार स्तनपान कराना इसके मुख्य कारक हैं।
🩺 आईवीएफ नहीं, अधिक उम्र और सी-सेक्शन हो सकते हैं स्तनपान में देरी की मुख्य वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, आईवीएफ से मां बनने वाली कुछ महिलाओं को स्तनपान में कठिनाई आ सकती है, किंतु आईवीएफ प्रक्रिया इसका प्रत्यक्ष कारण नहीं है।
वास्तव में इसकी मुख्य वजहें अधिक उम्र में मां बनना, सिजेरियन डिलीवरी (C-Section), जुड़वां बच्चे (Twins), समय से पूर्व प्रसव (Preterm Birth), गर्भावस्था में मधुमेह (Gestational Diabetes) या उच्च रक्तचाप (Hypertension) जैसी चिकित्सीय स्थितियां होती हैं। ये स्वास्थ्य समस्याएं स्तनपान शुरू होने में आंशिक देरी कर सकती हैं, किंतु आईवीएफ उपचार नहीं।
👶 WHO की महत्वपूर्ण सलाह: जन्म के पहले घंटे में शुरू कराएं स्तनपान, 6 महीने तक दें केवल मां का दूध
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार, नवजात शिशु के जन्म के प्रथम 1 घंटे के भीतर स्तनपान प्रारंभ कर देना चाहिए और शुरुआती 6 महीनों तक केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए।
मां का गाढ़ा पीला दूध (Colostrum) शिशु को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है तथा उसे संक्रमण, दस्त व भविष्य की कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा कवच प्रदान करता है। इसके साथ ही स्तनपान कराने से मां की शारीरिक रिकवरी तेजी से होती है और कैंसर व मेटाबॉलिक बीमारियों का जोखिम भी कम होता है।
💡 गर्भवती महिलाएं अपनाएं ये जरूरी टिप्स: समय रहते लें लैक्टेशन कंसल्टेंट की सलाह
चिकित्सक परामर्श देते हैं कि आईवीएफ से गर्भवती हुई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान ही अपनी गाइनकोलॉजिस्ट, फर्टिलिटी एक्सपर्ट या लैक्टेशन कंसल्टेंट (Lactation Consultant) से मिलकर ब्रेस्टफीडिंग प्लान पर चर्चा कर लेनी चाहिए।
यदि प्रसव के बाद दूध का निर्माण कम हो रहा हो, बच्चा सही से लैच न कर पा रहा हो या स्तनों में दर्द/सूजन की समस्या हो, तो बिना विलंब किए विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए ताकि समस्या का समय पर समाधान हो सके।






