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पंजाब

स्वतंत्रता दिवस पर बधाई संदेशों के बीच सक्रिय हुए साइबर ठग, फर्जी लिंक्स से जिंदगी भर की जमा-पूंजी पर खतरा

लुधियाना (पंजाब): स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व और आगामी त्योहारों के पावन अवसर पर जहां सोशल मीडिया तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शुभकामना और बधाई संदेशों का तांता लग जाता है, वहीं इसी भीड़, उत्साह और भरोसे का अनुचित लाभ उठाने के लिए शातिर साइबर अपराधी भी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं।

रिश्तेदारों, परिजनों और मित्रों से प्राप्त होने वाले बधाई संदेशों के बीच भेजा गया एक फर्जी लिंक, लुभावना गिफ्ट ऑफर या कोई संदिग्ध फाइल आपकी जिंदगी भर की मेहनत की गाढ़ी कमाई साफ कर सकती है। साइबर जालसाज ऐसे राष्ट्रीय अवसरों पर लोगों की धार्मिक-राष्ट्रीय भावनाओं और उत्सुकता का लाभ उठाकर चंद पलों में मोबाइल का पूरा रिमोट एक्सेस अपने हाथ में ले रहे हैं।

⚠️ पुलिस की सख्त चेतावनी: अनजान ही नहीं, परिचितों के नंबर से आए संदिग्ध मैसेज से भी रहें सावधान

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य पुलिस प्रशासन और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने आम नागरिकों के लिए व्यापक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।

पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि स्वतंत्रता दिवस अथवा त्योहारों के दौरान यदि किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फ्री-गिफ्ट, सरकारी योजना का लाभ, विशेष डिस्काउंट ऑफर या लकी-ड्रॉ का दावा करने वाला कोई लिंक प्राप्त हो, तो उस पर भूलकर भी क्लिक न करें। पुलिस ने आगाह किया कि कई बार ऐसा संदेश किसी बेहद करीबी रिश्तेदार या मित्र के नंबर से भी आ सकता है, क्योंकि जालसाजों द्वारा उनका फोन पहले से ही हैक किया जा चुका होता है। अतः बिना पूरी जांच-परख और पुष्टि के किसी भी लिंक को खोलने से बचें।

📱 जानिए कैसे बिछाते हैं जाल: एक लिंक पर क्लिक करते ही पूरा मोबाइल हो जाता है हैक

साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रीय पर्वों पर करोड़ों डिजिटल संदेशों के आदान-प्रदान का फायदा उठाकर ठग एक विस्तृत आपराधिक नेटवर्क (चेन) तैयार करते हैं।

सर्वप्रथम वे किसी एक असावधान व्यक्ति का फोन हैक करते हैं और उसके व्हाट्सएप कॉन्टैक्ट्स में मौजूद सभी परिचितों को आकर्षक और लुभावने संदेशों के साथ फर्जी लिंक फॉरवर्ड कर देते हैं। चूंकि संदेश किसी विश्वसनीय व्यक्ति के नंबर से आता है, इसलिए लोग बिना सोचे-समझे उस पर भरोसा कर लिंक दबा देते हैं। जैसे ही कोई यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है, उसका फोन भी ठगों के सर्वर और नियंत्रण में चला जाता है, जिससे यह साइबर ठगी का जाल तेजी से फैलता चला जाता है।

📂 PDF और APK फाइल में समझें अंतर: शादी के डिजिटल कार्ड व ग्रीटिंग्स के नाम पर भेजा जा रहा मैलवेयर

साइबर सेल के विशेषज्ञों ने आमजन को सतर्क करते हुए स्पष्ट किया है कि बधाई संदेशों के साथ भेजी जाने वाली अनजान APK फाइलों से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।

अक्सर लोग सामान्य पीडीएफ (PDF) और एपीके (APK) फाइल के तकनीकी अंतर को नहीं समझ पाते। पीडीएफ एक सामान्य डॉक्यूमेंट फाइल होती है, जिसे खोलने के लिए मोबाइल में कोई नई अनधिकृत ऐप इंस्टॉल नहीं करनी पड़ती। वहीं दूसरी ओर, एपीके फाइल एक एप्लीकेशन इंस्टॉलर होती है। इस पर क्लिक करते ही बैकग्राउंड में एक खतरनाक जासूसी ऐप (Spyware/Malware) इंस्टॉल हो जाती है, जो आपके मोबाइल की बैंकिंग ऐप्स, ओटीपी मैसेज, गैलरी, कॉन्टैक्ट्स और निजी डेटा का पूरा नियंत्रण अपराधियों को सौंप देती है। आजकल शादी-ब्याह के डिजिटल निमंत्रण पत्र (Digital Invitation Card) और ग्रीटिंग्स के नाम पर भी ऐसी ही घातक APK फाइलें भेजी जा रही हैं।

📞 ठगी या साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें? तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें संपर्क

यदि अनजाने में कोई व्यक्ति ऐसे किसी साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाता है या किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के पश्चात मोबाइल में संदिग्ध गतिविधि या बैंक से अनधिकृत निकासी का अंदेशा होता है, तो बिना एक पल भी गंवाए भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें।

इसके साथ ही आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। घटना के तुरंत बाद ‘गोल्डन आवर्स’ (शुरुआती समय) में 1930 पर दी गई सूचना से वित्तीय सुरक्षा तंत्र और नोडल बैंक तुरंत सक्रिय हो जाते हैं, जिससे साइबर अपराधियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए पैसे को होल्ड अथवा फ्रीज कराने में मदद मिलती है और वित्तीय नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है।

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