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टेक्नोलॉजी

एआई का इस्तेमाल कंपनियों पर पड़ा भारी: टॉप 1% फर्में हर कर्मचारी पर खर्च कर रहीं ₹7 लाख, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

वैश्विक स्तर पर कॉर्पोरेट जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा तेजी से विस्तृत हो रहा है। कंपनियां अपने कर्मचारियों को रोजमर्रा के कार्यों में एआई टूल्स के अधिकतम उपयोग के लिए प्रेरित कर रही हैं।

सामान्य धारणा यह रही है कि एआई के उपयोग से कार्यकुशलता बढ़ती है, समय की बचत होती है और कंपनियों का समग्र मुनाफा सुधरता है। हालांकि, वित्तीय आंकड़ों की जमीनी हकीकत एक अलग ही तस्वीर बयां कर रही है। हालिया रिपोर्ट्स से यह बात सामने आई है कि एआई का अनियंत्रित उपयोग कंपनियों के परिचालन बजट पर अत्यधिक भारी साबित हो रहा है।

💰 प्रति कर्मचारी ₹7 लाख तक पहुंचा एआई खर्च, रैंप रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

रैंप (Ramp) के एआई इंडेक्स की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की शीर्ष 1 प्रतिशत कंपनियों का एआई बजट अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है।

  • टॉप 1% कंपनियां: ये कंपनियां अपने प्रत्येक कर्मचारी के लिए एआई टूल्स पर औसतन 7,400 डॉलर (लगभग ₹7 लाख) खर्च कर रही हैं।

  • खर्च में भारी उछाल: इसी वर्ष जनवरी में यह खर्च प्रति कर्मचारी 2,590 डॉलर (लगभग ₹2.47 लाख) था, जो महज कुछ ही महीनों में करीब तीन गुना बढ़ गया।

  • अन्य श्रेणियों का स्तर: जहां शीर्ष 10% कंपनियों का औसत खर्च 650 डॉलर (करीब ₹62,000) है, वहीं सभी सामान्य कंपनियों का कुल औसत मात्र 11.95 डॉलर (लगभग ₹1,140) दर्ज किया गया है।

📊 ‘पर-टोकन’ बिलिंग मॉडल बना मुख्य चुनौती, सैलरी से अधिक हुआ प्रोसेसिंग खर्च

एआई लागत में इस तीव्र वृद्धि का मुख्य कारण ओपनएआई (OpenAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसी प्रमुख एआई लैब्स द्वारा अपनाया गया ‘प्रति-टोकन’ (Per-Token) बिलिंग सिस्टम है।

इस मॉडल के अंतर्गत कंपनियां जितने अधिक टोकन या प्रॉम्प्ट प्रोसेस करती हैं, बिलिंग राशि उसी अनुपात में बढ़ती जाती है। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन के अनुसार, कंपनियों द्वारा पहली तिमाही में ही पूरे वर्ष का एआई बजट समाप्त होने की बातें अब आम हो गई हैं। वहीं, चिप दिग्गज एनवीडिया के अधिकारी ब्रायन कटानजारो ने भी स्वीकार किया कि उनकी तकनीकी टीमों के लिए कंप्यूटर प्रोसेसिंग (कंप्यूट) का खर्च कर्मचारियों के वेतन से भी अधिक हो गया है।

🛑 बजट असंतुलन के बाद बड़ी टेक कंपनियों ने तय की एआई उपयोग की सीमा

बढ़ते और अनियंत्रित खर्चों को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक दिग्गज कंपनियों ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

अमेजन, उबर और वॉलमार्ट जैसी अग्रणी कंपनियों ने कर्मचारियों द्वारा अत्यधिक टोकन खपत पर रोक लगाते हुए निश्चित सीमाएं (Usage Limits) तय कर दी हैं। कंपनियों का उद्देश्य गैर-जरूरी और अनियंत्रित प्रॉम्प्टिंग पर लगाम लगाना है, जिससे यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि एआई का उपयोग अब असीमित न होकर नियंत्रित दायरे में ही संभव होगा।

📈 बाजार में एंथ्रोपिक का दबदबा, ओपन-सोर्स मॉडल्स की ओर बढ़ा रुझान

कॉर्पोरेट उपयोग के मामले में अमेरिकी बाजार में एंथ्रोपिक सबसे आगे बना हुआ है:

  • एंथ्रोपिक (Anthropic): लगभग 43.5% कारोबारी संस्थान एंथ्रोपिक के मॉडल्स पर निर्भर हैं।

  • ओपनएआई (OpenAI): 39.7% बाजार हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर काबिज है।

  • स्पेसएक्स/एक्सएआई (SpaceX/xAI): करीब 4% बाजार पर इसकी पकड़ है।

  • ओपन-सोर्स मॉडल्स: लागत कम करने के लिए कई भारी यूजर्स अब ओपन-सोर्स विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनकी हिस्सेदारी बढ़कर 6.1% तक पहुंच गई है।

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