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छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार का हलफनामा, पुलिस बर्बरता के आरोपों से इनकार

नई दिल्ली/पटना: बिहार में हाल ही में हुए व्यापक छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना विस्तृत हलफनामा दाखिल कर दिया है।

राज्य सरकार ने पुलिस द्वारा ‘अनुपातहीन बल प्रयोग’ (Excessive Force) के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने और हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए मानक प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक कदम उठाए थे।

🔫 सीवान में AK-47 और 9 MM पिस्टल से फायरिंग पर सरकार का पक्ष, आरोपी जवान निलंबित

सीवान में पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग किए जाने के बहुचर्चित मामले पर सरकार ने अदालत को तथ्यात्मक जानकारी दी:

  • हवा में फायरिंग: सरकार ने बताया कि उग्र भीड़ में घिर जाने के बाद एक कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में हवा में चार राउंड गोलियां चलाई थीं, जिससे किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं पहुंची।

  • हथियार का दुरुपयोग व कार्रवाई: सरकार ने स्वीकार किया कि सामान्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने में AK-47 जैसे प्लाटून स्तर के हथियार का इस्तेमाल वर्जित है। संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है तथा डीजीपी ने इस बाबत सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

  • 9 MM पिस्टल से फायरिंग: भीड़ को तितर-बितर करने के लिए एक एएसआई (ASI) ने अपनी सर्विस पिस्टल से 2 राउंड फायर किए थे, जिसमें 3 प्रदर्शनकारी घायल हुए। घटना की बैलिस्टिक जांच (दूरी, कोण और हथियार का प्रकार) अभी जारी है।

🧱 सीवान में गांधी मैदान से जेपी चौक तक भारी पथराव, 157 पुलिसकर्मी जख्मी

हलफनामे के अनुसार, छात्र और युवा संगठनों के प्रदर्शनकारी सीवान के गांधी मैदान से जेपी चौक की ओर मार्च कर रहे थे।

दोपहर के समय प्रदर्शनकारियों ने अचानक पुलिस बल पर भारी पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद मैरवा रोड और गोपालगंज रोड की तरफ से आए उपद्रवी तत्वों ने स्थिति को हिंसक बना दिया। इस पथराव में सीवान एसपी, 2 एसडीपीओ, 2 इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 13 कांस्टेबल समेत 20 स्थानीय पुलिसकर्मी घायल हुए। पूरे आंदोलन के दौरान राज्यभर में कुल 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए तथा पुलिस वाहनों व ट्रैफिक ट्रॉलियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

💧 आंसू गैस व वाटर कैनन का प्रयोग, 82 लोगों पर दर्ज हुई FIR

हिंसक भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस द्वारा चरणबद्ध तरीके से वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का उपयोग किया गया।

सीवान हिंसा के संबंध में कुल 82 नामजद/अज्ञात लोगों के खिलाफ 6 अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं, जिनमें से 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न पुलिस लाइनों और इकाइयों से अतिरिक्त बल तैनात किया गया था।

⚖️ 22 से 25 जुलाई के बीच 69 FIR, 222 छात्रों को बिना आपराधिक रिकॉर्ड के मिली जमानत

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच पूरे प्रदेश में 69 एफआईआर दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को हिरासत में लिया गया था:

  • छात्रों की रिहाई: सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को नियमित जमानत पर रिहा कर दिया गया है।

  • नाबालिगों की रिहाई: 75 किशोरों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के माध्यम से साधारण मुचलके (बॉन्ड) पर रिहा किया गया।

  • डेटा सुरक्षा: सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन वीडियो और डिजिटल साक्ष्य अतिरिक्त डीजीपी (ADGP) की निगरानी में सुरक्षित रखवाए गए हैं। साथ ही, छात्रों और प्रदर्शनकारियों की व्यक्तिगत पहचान व डिजिटल डेटा को सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा करने पर पूर्ण रोक लगाई गई है।

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