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मध्यप्रदेश

भोपाल में दिखा पहला ‘जेन अल्फा’ प्रोटेस्ट: KVS में विलय के खिलाफ सड़क पर उतरे रीजनल स्कूल के 400 छात्र

भोपाल (मध्य प्रदेश): राजधानी भोपाल में मंगलवार (18 अगस्त) को एक अनोखा और ऐतिहासिक प्रदर्शन देखने को मिला। यह पहला अवसर था जब किसी शैक्षणिक संस्थान और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर ‘जेन अल्फा’ (Gen Alpha) पीढ़ी के स्कूली बच्चे खुद सड़कों पर उतर आए।

रीजनल स्कूल (डीएमएस) को केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में विलय (Merger) किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में करीब 300 से 400 छात्र-छात्राएं लामबंद हो गए। हाथों में ‘सेव डीएमएस’ (Save DMS) और अन्य मांगों की तख्तियां लेकर विद्यार्थियों ने स्कूल परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने रीजनल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसके गुप्ता को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस संविलयन प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की और चेताया कि मांगें पूरी न होने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।

🏫 स्कूल की प्रयोगात्मक पहचान पर खतरा: छात्र और अभिभावकों ने जताई गहरी चिंता

प्रदर्शनकारी छात्रों और उनके अभिभावकों ने विद्यालय के अस्तित्व और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर अपनी बात रखी:

  • नवाचार की विशिष्ट पहचान: छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि रीजनल स्कूल कोई सामान्य विद्यालय नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रयोग और नए नवाचारों के लिए इसकी राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान है।

  • मूल अवधारणा प्रभावित होने का डर: उनका तर्क है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन में शामिल करने से इस संस्थान की मूल शैक्षणिक अवधारणा और प्रयोगात्मक स्वरूप पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

  • नीतिगत बदलावों का आधार: अभिभावकों ने रेखांकित किया कि इस स्कूल में किए जाने वाले शैक्षणिक प्रयोगों और पद्धतियों के आधार पर ही देश भर की स्कूली शिक्षा में महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार किए जाते रहे हैं।

❓ केंद्रीय विद्यालय की प्रवेश नीति और सामान्य बच्चों के भविष्य को लेकर असमंजस

अभिभावकों ने केवीएस की प्रवेश प्रक्रिया और प्राथमिकताओं को लेकर गंभीर आशंकाएं व्यक्त की हैं:

  • प्रवेश प्राथमिकताओं का टकराव: अभिभावकों का कहना है कि केंद्रीय विद्यालयों में सरकारी कर्मचारियों के बच्चों के लिए विशेष प्राथमिकताएं तय होती हैं, जिससे सामान्य व स्थानीय परिवारों के बच्चों के प्रवेश का रास्ता कठिन हो जाएगा।

  • मौजूदा छात्रों का भविष्य: संविलयन के बाद वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

  • संवाद की कमी: अभिभावकों ने रोष व्यक्त किया कि इतने बड़े और संवेदनशील नीतिगत फैसले से पहले न तो छात्रों से राय ली गई और न ही अभिभावकों के साथ कोई परामर्श बैठक आयोजित की गई।

📚 1000 विद्यार्थियों और वोकेशनल कोर्स के भविष्य पर उठे सवाल, NCERT से मांगा जवाब

रीजनल स्कूल में संचालित शैक्षणिक व्यवस्थाओं और पाठ्यक्रमों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है:

  • छात्र संख्या व संरचना: विद्यालय में नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक लगभग 1000 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और प्रत्येक कक्षा में दो-दो सेक्शन संचालित होते हैं।

  • पाठ्यक्रम का ढांचा: 11वीं और 12वीं में कॉमर्स और आर्ट्स के अलावा कई प्रकार के व्यावसायिक (Vocational) पाठ्यक्रम भी पढ़ाए जाते हैं।

  • अभिभावकों की मांग: अभिभावकों और शिक्षकों का सवाल है कि KVS में जाने के बाद इन वोकेशनल कोर्सेज, शिक्षकों की स्थिति और मौजूदा प्रवेश व्यवस्था का क्या होगा? उन्होंने सरकार और एनसीईआरटी (NCERT) से संविलयन के बाद की पूरी व्यवस्था पर तत्काल श्वेत पत्र/स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

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