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हिमाचल प्रदेश

हिमाचल में 25 साल बाद फिर शुरू होगी सरकारी लॉटरी: वित्तीय संकट से निपटने के लिए सुक्खू सरकार ने जारी किया टेंडर, जानें नियम व शर्तें

शिमला (हिमाचल प्रदेश): राज्य के प्रतिकूल वित्तीय हालात से निपटने और राजस्व में बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार करीब 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर सरकारी लॉटरी की बिक्री शुरू करने जा रही है।

इसके लिए राज्य के वित्त विभाग (निदेशालय कोषागार, लेखा व लॉटरीज) ने पेपर और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से लॉटरी की बिक्री के लिए ‘सोल एंड सेलिंग एजेंट’ (Sole & Selling Agent) नियुक्त करने हेतु आधिकारिक टेंडर प्रक्रिया आमंत्रित कर दी है।

📅 14 सितंबर तक जमा होंगी बोलियां, रोजाना 12 ड्रा और साल में 3 बंपर ड्रा का प्रावधान

टेंडर की शर्तों और लॉटरी संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं:

  • टेंडर की अंतिम तिथि: इच्छुक व पात्र कंपनियां 14 सितंबर 2026 की शाम 4:00 बजे तक अपनी ऑनलाइन ई-बिड (बोली) जमा कर सकती हैं।

  • ड्रा की सीमा: लॉटरी योजना के तहत 24 घंटे में अधिकतम 12 ड्रा आयोजित किए जा सकेंगे।

  • बंपर ड्रा व अवकाश: पूरे वर्ष में 3 विशेष बंपर ड्रा आयोजित होंगे, जबकि राष्ट्रीय अवकाश के दिनों में कोई भी लॉटरी ड्रा नहीं निकाला जाएगा।

  • नियमावली: लॉटरी का पूरा संचालन ‘हिमाचल प्रदेश लॉटरी नियम-2026’ और केंद्र सरकार के लॉटरी विनियमन अधिनियम के तहत ही किया जाएगा।

💼 एजेंसी के लिए कड़े नियम: ₹10 करोड़ सालाना लाइसेंस फीस और ₹30 करोड़ सिक्योरिटी डिपॉजिट

लॉटरी संचालन का ठेका लेने वाली कंपनी के लिए सरकार ने सख्त वित्तीय शर्तें निर्धारित की हैं:

  • वार्षिक लाइसेंस फीस: एजेंसी को सरकार को प्रतिवर्ष न्यूनतम ₹10 करोड़ की लाइसेंस फीस चुकानी होगी, जिसमें हर साल 5 प्रतिशत की स्वतः वृद्धि होगी।

  • गारंटेड न्यूनतम राजस्व: इसके अतिरिक्त प्रतिवर्ष कम से कम ₹6 करोड़ का न्यूनतम राजस्व भी राज्य सरकार को सुनिश्चित करना होगा। यदि राजस्व हिस्सेदारी अधिक बनती है, तो अतिरिक्त लाभ भी सरकार को देना होगा।

  • सिक्योरिटी डिपॉजिट: वित्तीय सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बोलीदाता एजेंसी को ₹30 करोड़ की भारी सिक्योरिटी राशि जमा करनी होगी।

🏛️ 1999 में धूमल सरकार ने लगाई थी रोक, अब बढ़ते घाटे के चलते बदला फैसला

राज्य में लॉटरी के इतिहास और वर्तमान परिस्थितियों की पृष्ठभूमि:

  • 1999 का प्रतिबंध: वर्ष 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सामाजिक व आर्थिक दुष्प्रभावों के चलते सरकारी लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।

  • प्रतिबंध की वजह: उस समय लॉटरी के कारण गरीब परिवारों, महिलाओं और युवाओं में बढ़ते आर्थिक नुकसान और लत को देखते हुए इसे बंद किया गया था।

  • वर्तमान स्थिति: हालांकि, मौजूदा समय में राज्य पर बढ़ते वित्तीय घाटे, कर्ज के बोझ और नए राजस्व स्रोतों की तलाश को देखते हुए सरकार ने कड़े नियमों के साथ इस विकल्प को फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है।

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