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अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप की नई पाबंदियों की तैयारी, राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- ‘अपनी शर्तों पर खत्म करेंगे युद्ध’

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष व कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है।

ट्रंप ने कहा है कि तेहरान युद्ध समाप्त करने और समझौता करने का इच्छुक तो है, लेकिन वह अभी अमेरिका के मुताबिक ‘सही डील’ (उचित शर्तों) पर आने के लिए तैयार नहीं हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान निकलने की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन की ओर से तेहरान पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी चल रही है।

⚔️ अपनी शर्तों पर युद्ध खत्म करना चाहता है ईरान: राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन

ईरान का रुख और पलटवार:

  • शर्तों पर अड़ा ईरान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट किया है कि ईरान अपनी शक्ति, संप्रभुता और तय शर्तों के आधार पर ही युद्ध को समाप्त करने के पक्ष में है।

  • अमेरिका पर गंभीर आरोप: ईरानी राष्ट्रपति ने दावा किया कि दुनिया ने ईरान की दृढ़ता को स्वीकार किया है। साथ ही उन्होंने अमेरिका पर ईरान के शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

  • शर्तों में बड़ा अंतर: दोनों देश सैद्धांतिक रूप से युद्ध समाप्ति की बात कर रहे हैं, लेकिन समझौते की प्राथमिक शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के रुख में भारी अंतर बना हुआ है।

⏳ 60 दिन की समयसीमा समाप्त, जानिए क्यों अटकी शांति वार्ता

कूटनीतिक गतिरोध और प्रमुख मांगें:

  • सीजफायर के बाद की वार्ता विफल: दोनों देशों के बीच युद्धविराम के बाद एक व्यापक समझौते के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन यह अवधि पूरी होने के बाद भी कोई स्थाई समाधान नहीं निकल सका।

  • परस्पर आरोप-प्रत्यारोप: वार्ता टूटने के लिए दोनों देशों ने एक-दूसरे की हठधर्मिता को जिम्मेदार ठहराया है।

  • ईरान की प्रमुख मांगें: ईरान ने स्पष्ट शर्त रखी है कि अमेरिका अपनी आर्थिक नाकाबंदी तुरंत हटाए, क्षेत्र से अपने सैनिकों की पूर्ण वापसी करे और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करे।

  • अमेरिका की मांगें: ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पर पूर्ण विराम लगाए और मिसाइल व रणनीतिक नीतियों में बड़ी रियायतें दे।

💰 अमेरिका की आर्थिक दबाव बढ़ाने की योजना, ईरान ने बताया ‘औपनिवेशिक नीति’

आर्थिक मोर्चे पर टकराव:

  • कड़े प्रतिबंधों की तैयारी: अमेरिका अब सैन्य दबाव के साथ-साथ आर्थिक घेराबंदी को सख्त करने जा रहा है, जिसके तहत तेहरान के वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्र पर नए प्रतिबंध लगाने की योजना है।

  • ईरान की आपत्ति: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन और ‘क्लासिक औपनिवेशिक नीति की वापसी’ करार दिया है।

🚢 ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बना टकराव का सबसे बड़ा केंद्र, ऊर्जा बाजार पर असर

रणनीतिक जलमार्ग और वैश्विक प्रभाव:

  • वैश्विक तेल मार्ग पर संकट: फारस की खाड़ी स्थित ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों पर पड़ रहा है।

  • नाकाबंदी हटाने की शर्त: ईरान का कहना है कि जब तक होर्मुज क्षेत्र से सैन्य दबाव और नाकाबंदी नहीं हटाई जाती, तब तक किसी भी समझौते पर पहुंचना संभव नहीं है, जबकि अमेरिका रणनीतिक रूप से दबाव बनाए रखने पर अड़ा है।

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