ब्रेकिंग
Supreme Court Hearing on SIR: चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फैसलों पर टली सुप्रीम कोर्ट की... Greater Noida Robotics Park: उत्तर प्रदेश में बनेगा देश का पहला 'प्रगति' रोबोटिक्स पार्क, योगी सरकार... Delhi High Court Notice: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR पर दिल्ली HC का नोटिस, पत्... Diwali and Chhath Puja Health Tips: दिवाली और छठ की व्यस्तता में सेहत का ऐसे रखें ख्याल, थकान और तना... डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में दी डेटा प्रोटेक्शन एक्ट को चुनौती, पत्रकारिता प... Delhi Ramlila Maidan Rally: दिल्ली में 1 नवंबर को होगी इंडिया गठबंधन की महारैली, 10 लाख लोगों के जुट... Flex-Fuel Vehicles in India: केंद्र सरकार का बड़ा कदम, 100% एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को मंजूरी; नि... Jan Suraaj Digital Manager Death: प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज को बड़ा झटका, डिजिटल मैनेजर देवपा... Ujjain News: सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया सिंहस्थ 2028 की 539 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का भूमिपूजन,... Rajasthan Drought News: राजस्थान में सूखे की मार, 14 जिलों की 80 तहसीलें घोषित हुईं गंभीर और मध्यम स...
मध्यप्रदेश

गुजरात की खारी जमीन से खाली हाथ लौटे विस्थापित, NVDA ने अटकाया मुआवजा; SDM ने दी सफाई

बड़वानी (मध्य प्रदेश): नर्मदा नदी पर निर्मित सरदार सरोवर बांध के डूब प्रभावितों के पुनर्वास और न्यायोचित मुआवजे की सरकारी फाइलों और धरातल की हकीकत में भारी विसंगति देखने को मिल रही है।

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में प्रशासनिक जटिलताओं और लालफीताशाही के चलते सैकड़ों विस्थापित ढाई दशक (25 वर्ष) बीत जाने के बाद भी अपने वाजिब हक के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को विवश हैं। विस्थापन की मार झेल रहे प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा राहत पहुंचाने के बजाय नए-नए नियमों, शर्तों और तकनीकी पेंचों के जरिए उन्हें लगातार उलझाया जा रहा है।

📜 कागजी चक्रव्यूह में उलझा सनगांव के राधेश्याम का मुआवजा: 54 लाख रुपये का भुगतान अटका

प्रशासनिक अनदेखी और नियमों का अजीबोगरीब पेंच:

  • शेष मुआवजे का मामला: सनगांव निवासी डूब प्रभावित राधेश्याम को कुल 60 लाख रुपये के पुनर्वास पैकेज में से 6 लाख रुपये पूर्व में प्राप्त हुए थे, जबकि शेष 54 लाख रुपये की राशि मां के निधन के बाद से रुकी हुई है।

  • दस्तावेजों की मौजूदगी: पीड़ित के पास 1986 की मार्कशीट, नगर पालिका की नियमित टैक्स रसीदें, पंजीकृत गोदनामा और तहसीलदार द्वारा जारी वैध कब्जा प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं।

  • अस्तित्वहीन गांव से रिपोर्ट की मांग: शिकायत निवारण प्राधिकरण (GRA) द्वारा वारिस प्रमाण पत्र मांगने पर स्थानीय राजस्व अमले ने उस गांव के पंचायत सचिव से रिपोर्ट प्रस्तुत करने की शर्त रख दी, जो गांव पूरी तरह जलमग्न होकर खाली हो चुका है। संबंधित सचिव का स्पष्ट कहना है कि निर्जन हो चुके गांव की रिपोर्ट वे किस आधार पर जारी करें।

🌾 गुजरात की अनुपयोगी खारी जमीन और ‘दोहरी राहत’ का तकनीकी पेच

विस्थापितों की जमीनी समस्याएं और एनवीडीए का रुख:

  • हिम्मत सिंह का प्रकरण: ग्राम कुकरा निवासी हिम्मत सिंह को वर्ष 2001-02 में गुजरात के भरूच में जमीन आवंटित की गई थी। कब्जा न मिलने पर वर्ष 2012 में बड़ोदरा सहायक आयुक्त ने आवंटन निरस्त कर मध्य प्रदेश में पुनर्वास की संस्तुति की थी। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत 2 हेक्टेयर जमीन के बदले 60 लाख रुपये का पैकेज देय था, जिसे नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) ‘दोहरी राहत’ का हवाला देकर रोके हुए है।

  • केसरोल की बंजर खारी भूमि: कुकरा राजघाट के बहादुर सिंह, बाबू सिंह, कनक सिंह सहित 22 परिवारों को वर्ष 2001 में गुजरात के केसरोल (भूखी खाड़ी) में तटीय जमीन दी गई थी। समुद्री खारे पानी के कारण फसलें बर्बाद हो गईं, जिसके बाद 2008 में ग्राम सभा ने आवंटन निरस्त कर दिया।

  • मजदूरी को मजबूर परिवार: मध्य प्रदेश लौटकर ये परिवार वर्तमान में दैनिक मजदूरी कर गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन इन्हें भी निर्धारित 60 लाख रुपये का पुनर्वास अनुदान अभी तक अप्राप्त है।

⚖️ विस्थापितों ने कलेक्टर से लगाई गुहार: SDM बोले- सिविल कोर्ट का सर्टिफिकेट अनिवार्य

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और वैधानिक पक्ष:

  • कलेक्टर व GRA से मांग: पीड़ित ग्रामीणों ने बड़वानी कलेक्टर और जीआरए (GRA) इंदौर को ज्ञापन सौंपकर अनुपयोगी खारी जमीनों के पट्टे औपचारिक रूप से निरस्त करने और शीर्ष अदालत के आदेशानुसार 60-60 लाख रुपये का विशेष पुनर्वास अनुदान अविलंब निर्गत करने का अनुरोध किया है।

  • एसडीएम का आधिकारिक बयान: बड़वानी एसडीएम भूपेंद्र रावत के अनुसार, दत्तक पुत्र के मामलों में विधिक उत्तराधिकार सुनिश्चित करने हेतु सक्षम सिविल कोर्ट से प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

  • फाइलों की जांच का आश्वासन: उपखंड प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कोर्ट का वैध उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त होते ही भुगतान की प्रक्रिया नियमानुसार संपादित की जाएगी, साथ ही अन्य सभी लंबित प्रकरणों की फाइलों की समीक्षा कर विधिक समाधान निकाला जाएगा।

Related Articles

Back to top button