बंद पड़ी CCI सीमेंट फैक्टरी की 200 एकड़ जमीन पर बनेगी इंडस्ट्रियल टाउनशिप, CM नायब सैनी ने दिए DPR के निर्देश

चंडीगढ़ (हरियाणा): चरखी दादरी में करीब तीन दशक से बंद पड़ी सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की 200 एकड़ बेशकीमती जमीन अब बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी।
हरियाणा सरकार ने यहां पहले से प्रस्तावित रिहायशी कॉलोनी के प्रोजेक्ट को बदलते हुए जिले की पहली आधुनिक इंडस्ट्रियल टाउनशिप स्थापित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को आयोजित उच्चस्तरीय प्रशासनिक बैठक में संबंधित अधिकारियों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तेजी से तैयार करने के निर्देश जारी किए।
📐 रिहायशी कॉलोनी की जगह औद्योगिक मॉडल का चयन: 2 साल के समय की बचत
परियोजना के स्वरूप में बदलाव के मुख्य कारण:
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मास्टर प्लान की बाध्यता: सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की इस भूमि का उपयोग पहले आवासीय बस्ती विकसित करने के लिए सोचा गया था।
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भू-उपयोग परिवर्तन की बाधा: शहर के मास्टर प्लान में यह पूरी 200 एकड़ जमीन औद्योगिक जोन (Industrial Zone) के तहत दर्ज है। ऐसे में इसका सीएलयू (CLU) या लैंड यूज बदलकर रिहायशी करने में कम से कम दो वर्ष की लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया लगती।
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त्वरित विकास का रास्ता: समय की बचत और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने मौजूदा लैंड यूज के अनुकूल ही औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने का व्यावहारिक निर्णय लिया।
🤝 केंद्र और HSIIDC की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी: संयुक्त रूप से तैयार होगा इंफ्रास्ट्रक्चर
विकास मॉडल और वित्तीय साझेदारी:
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क्रियान्वयन एजेंसी: इस पूरी टाउनशिप के विकास और प्रबंधन का जिम्मा हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (HSIIDC) को सौंपा गया है।
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साझेदारी का प्रारूप: परियोजना में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय और HSIIDC के बीच 50-50 प्रतिशत की वित्तीय व विकासात्मक हिस्सेदारी प्रस्तावित की गई है।
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मूलभूत सुविधाएं: HSIIDC आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज, बिजली-पानी आपूर्ति, सीवेज ट्रीटमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसी जरूरी आधारभूत सुविधाएं तैयार करेगा। डीपीआर के जरिए कुल विकास लागत, निवेश क्षमता और संभावित मुनाफे का समग्र आकलन किया जाएगा।
🛣️ 152-D एक्सप्रेसवे और रेलवे स्टेशन से मजबूत कनेक्टिविटी: भविष्य में विस्तार की योजना
परियोजना के रणनीतिक लाभ:
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परिवहन की सुगमता: यह जमीन दादरी रेलवे स्टेशन के बिल्कुल समीप स्थित है और सीधे 152-D ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से कनेक्टेड है। इस शानदार कनेक्टिविटी से उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार माल भेजने में अत्यधिक सहूलियत मिलेगी।
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विस्तार की संभावनाएं: सरकार भविष्य में स्थानीय भू-मालिकों से आपसी सहमति के आधार पर आसपास की भूमि अधिग्रहित कर टाउनशिप का दायरा बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, ताकि मध्यम और बड़े विनिर्माण उद्योगों के लिए भी पर्याप्त भूखंड मिल सकें।
🏗️ 1500 एकड़ की IMT के बजाय कॉम्पैक्ट टाउनशिप मॉडल पर फोकस
औद्योगिक नीति का नया दृष्टिकोण:
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कॉम्पैक्ट मॉडल: राज्य सरकार प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सुनियोजित मैन्युफैक्चरिंग हब तैयार कर रही है। परंपरागत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग टाउनशिप (IMT) के लिए कम से कम 1500 एकड़ जमीन की जरूरत होती है।
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उपयुक्त आकार: दादरी का यह 200 एकड़ का क्षेत्र छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए आदर्श और व्यावहारिक कॉम्पैक्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप मॉडल माना गया है।
🏛️ मनोहर सरकार की पहल को नायब सरकार में मिली नई दिशा: विधायक की मांग पर मुहर
राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि:
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पिछली सरकारों का प्रयास: सीमेंट फैक्टरी की जमीन के सदुपयोग की कवायद पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में शुरू हुई थी और केंद्र स्तर पर रिहायशी विकास को लेकर कई बार पत्राचार भी हुआ था।
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स्थानीय मांग पर मुहर: दादरी के विधायक सुनील सतपाल सांगवान ने स्थानीय युवाओं के रोजगार और आर्थिक विकास को देखते हुए मुख्यमंत्री के समक्ष यहां औद्योगिक टाउनशिप बनाने का सशक्त प्रस्ताव रखा।
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डीपीआर पर काम शुरू: मुख्यमंत्री ने जनहित के इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाते हुए अधिकारियों को डीपीआर की प्रक्रिया युद्धस्तर पर पूरी करने का आदेश दिया है।





